सरकारी योजनाओं का अंकेक्षक नियुक्ति एवं अंकेक्षण में व्याप्त खामी एवं व्याप्त भ्रष्टाचार

रितेश आनंद
भारत के C &AG के द्वारा PSU के वैद्यानिक अंकेक्षण हेतु Chartered Accountants Firms को empanelment किया जाता है एवं उन्हीं empanelled CAs Firm से PSUs का अंकेक्षण करवाया जाता है इस व्यवस्था में अंकेक्षक की स्वतंत्रता बनी रहती है अंकेक्षक स्वतंत्र रूप से अपने विचार प्रकट करते हैं | अंकेक्षकों के स्वतंत्रता के लिए कंपनी क़ानून , आयकर कानून आदि में उचित प्रावधानों की व्यवस्था की गयी है |
सरकार द्वारा जनता से कर के रूप में राशि इकठ्ठा किया जाता है तथा संगृहीत धन से कई प्रकार के योजनाओं , जो कि जनता के कल्याण के लिए होते हैं , को तैयार किया जाता है तथा कल्याणकारी योजनाओं को लागु करने हेतु राज्य सरकारों को तथा राज्य सरकारों से जिलों , प्रखंडों, ग्राम पंचायतों को राशि भेजी जाती है जो कि विभिन्न प्रकार के लाभार्थियों को वितरित किया जाता है , जन कल्याण में तरह तरह के खर्च किये जाते हैं |
खर्चे करने वाले प्राधिकरण , विभागों , जिलों के द्वारा स्वयं अंकेक्षकों की नियुक्ति
देश में कल्याणकारी सरकारी योजनाओं के खर्चों का अंकेक्षण की व्यवस्था कुछ ऐसी है कि जिस प्राधिकरण , विभागों , जिलों , विश्वविधालयों , महाविधालयों , विधालयों आदि को खर्च करने के लिए राशि भेजी जाती है तथा वे जो खर्चे करते हैं , उन खर्चों के अंकेक्षण हेतु अंकेक्षक भी वे ही नियुक्त करते हैं तथा अंकेक्षक को नियंत्रित कर मनोनुकूल अंकेक्षण प्रतिवेदन एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र तैयार करवाते हैं जिनके आधार पर केंद्र सरकार , राज्य सरकार द्वारा पुनः उन प्राधिकरणों, विभागों , जिलों को खर्च करने के लिए राशि भेजी जाती है |
केंद्र सरकार के विभाग उक्त अंकेक्षण प्रतिवेदन को स्वीकार कर लेते हैं तथा पुनः राशि भेज देते हैं , ऐसा किसी एक ख़ास योजना की कहानी नहीं है ,लगभग सभी कल्याणकारी योजना चाहे ग्रामीण विकास, पंचायती राज , समाज कल्याण , शिक्षा, स्वास्थ्य , कृषि आदि किसी भी विभाग को लें हर जगह योजना की राशि खर्च करने वाले ही अंकेक्षक नियुक्त कर उनसे अंकेक्षण प्रतिवेदन तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर केंद्र सरकार को भेज देते हैं |
उपरोक्त तरीके से नियुक्त अंकेक्षक स्वतंत्र विचार नहीं रख पाते हैं क्योंकि उन पर मनोनुकूल रिपोर्ट का दबाव नियोक्ता के द्वारा दिया जता है |
खर्च करने वाले प्राधिकरणों, विभागों , जिलों का मुख्य उद्येश्य किसी भी तरह से अंकेक्षण प्रतिवेदन तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर केंद्र सरकार को भेज कर पुनः राशि मंगवाना होता है तथा खर्चों के अंकेक्षण के नाम पर खानापूर्ति किया जाता है |
सुधार के उपाय
सरकार को चाहिए कि सभी सरकारी योजनाओं के अंकेक्षण के लिए स्वतंत्र अंकेक्षकों की नियुक्ति हेतु या तो C & AG को , या थे इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया को अधिकृत किया जाये या और कोई स्वतंत्र व्यवस्था करे ताकि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किये जाने वाले खर्चों का स्वतंत्र अंकेक्षण हो सके और भ्रष्टाचार को दूर किया जा सके |
जब तक राशि खर्च करने वाले के पास अंकेक्षकों की नियुक्ति का अधिकार रहेगा , स्वतंत्र अंकेक्षण की संभावना नहीं होगी |
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