बिहार के 25 प्रतिभागियों नें एकीकृत नगर पालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कौशल विकास कार्यक्रम में हिस्सा लिया
सीएसआईआर- सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुर ने 16-18 मार्च के बीच "एकीकृत नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: शून्य अपशिष्ट समाधान" विषय पर तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्रों एवं शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवा सलाहकार नेटवर्क ( आयोजक- प्रगति बायो एवं रिन्यूवल एनर्जी), बिहार के अधिकारियों सहित कुल 25 प्रतिभागियों नें भाग लिया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रो (डॉ.) हरीश हिरानी ने बताया कि हमारे समाज में लोग स्वदेशी रूप से विकसित तकनीकों के बजाय विदेशी तकनीकों पर अधिक भरोसा करते हैं।
प्रो. हिरानी ने यह भी कहा कि सीएसआईआर-सीएमईआरआई स्वदेशी तकनीको को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। संस्थान कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता के बीच इन तकनीकों के बारे में जागरूकता लाने और ज्ञान वर्धन करने का प्रयास कर रहा है। क्योंकि सामाजिक व राष्ट्रीय विकास प्राप्त करने और वास्तविक आत्मानिर्भर भारत की ओर अग्रसर होने का यही एक जरिया है। प्रो. हिरानी ने यह भी कहा कि हमारा देश प्रतिवर्ष भारी मात्रा में कचरे का उत्पादन करता है जो एक बहुत बड़े क्षेत्र को अनुपयोगी बना देता है, साथ ही पर्यावरण में अस्वछता और प्रदूषण भी फैलता है।
ऐसी स्थिति से वैज्ञानिक रूप से निपटने के लिए संस्थान एकीकृत नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक अनूठी तकनीक और डिजाइन विकसित की है। इस विकसित प्रणाली में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का मशीनी पृथक्करण, बगीचे से निकले कचरे और अघुलनशील कचरे सहित हर प्रकार के जैविक कचरे के संपर्क रहित निपटान का अभ्यास कर रही है।
आवासीय परिसर से उत्पन्न दैनिक कचरे को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निपटान किया जा रहा है, जिससे कचरों के ढेर से मुक्ति मिल रही है। इस तरह विकेन्द्रीकृत कचरे के निष्पादन से पर्यावरण में फैल रहे कोरोना वायरस जैसे पैथोजेन के चेन को तोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही इस तकनीक का रख रखाव व कार्यान्वयन सरल है। सीएसआईआर- सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान एमएसएमई के सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहती है।
कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों ने इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्थान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। सहभागियों नें यह भी साझा किया कि अपशिष्ट प्रबंधन में कुशल श्रमशक्ति की कमी के कारण इस क्षेत्र में नौकरी और व्यापार के अवसरों की भारी संभावना है। उन्होनें आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन का अनुरोध किया। अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सीएसआईआर-सीएमईआरआई भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 को एक महत्वपूर्ण बल प्रदान करेंगी।
प्रो. हिरानी ने उक्त कौशल विकास कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्रों को प्रमाणपत्र भी सौंपे और हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया।
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