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होली का गीत

होली का गीत 

होली आई रे ! आई रे !
होली आई रे!

अंग अंग में मस्ती छाई 
भंग चढ़ी ठण्डाई 
वासंती रस घोले पल-छिन 
बहती है पुरवाई 
फगुनाहट की आहट पाकर
पल-पल है मन चौंके 
बंधन कोई नहीं उम्र का 
दे-दे कोई दवाई

होली भाई रे ! भाई रे !
होली भाई रे !

रंग गुलाल मले गालों में 
टल्ली निपट निठल्ले 
गोरी के गालों पे चिपके
देखें 'डिम्पल' छल्ले 
मधुबन में सब घूम रहे हैं 
छोड़ै फूल न कलियाँ   
बौराए मौसम के संग में 
झूमें  गली-मुहल्ले 

होली पाई रे ! पाई रे !
होली पाई रे !

अंगिया-वगिया गीली हो के
करने लगी ठिठोली 
तंग पड़ गयी चोली, रंग से
अंखिया मारे गोली
रस में सराबोर होकर के  
जियरा धक-धक धड़के
चूर नशे में बहके पल-छिन 
बहकी-बहकी बोली 

होली छाई रे ! छाई रे !
होली छाई रे !

पापड़ गुड़ के पारे मठरी 
फूली-फूली गुझिया
ढोल मंजीरे ताल दे रहे 
फाग गा रहे रसिया  
डूब गये हैं रूप ताल में 
बोलें  होली  हो ली
रीति न छूटे प्रीति न छूटे 
रंग न छूटे अंगिया

होली गाई रे ! गाई रे !
होली गाई रे !
           *
~जयराम जय
पर्णिका,बी-11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,
कल्याणपुर, कानपुर-208017(उप्र)
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