
कविता बड़ी प्रभावी (कविता)
जब विश्व वेदना हृदय सिंधु में
करने लगती है दोलन।
शब्द रुप सजाकर कविता
करने लगती नव सर्जन।।
मति सीप बन स्वाति शारदा
करती है आवाहन।
शांति सुधा लगती है वरसने
करता नर अवगाहन।।
शब्द अर्थ सहचर बन आते
अलंकृत कर नव रुप।
धारना करते सभी हृदय में
हो याचक या भूप।।
भाव भेद रस भेद मनोहर
चरणबद्ध कवि राग।
'मिश्रअणु' कविता आती है
लेकर नव अनुराग।।
अंत:वेदना बन विश्व वेदना
जब जन में होती हावी।
सच कहते हैं कहने वाले
वह कविता बड़ी प्रभावी।।
--:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र 'अणु'
वलिदाद अरवल (बिहार)
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