महुवे का गंध
महुवे का गंध,
बता रहा है सबको-
अभी छाया है बसंत।१।
बैठ आमों की डाली,
बोल रही है कोयल काली-
अभी मादक है दिगंत।२।
सेमर और गुलमोहर,
दिख रहे सुंदर-
खिले-खिले जिवंत।३।
प्रकृति इठला रही है,
नव रुप दिखा रही है-
जैसे कामिनी कंत।४।
सुन चैत्र नवरात्री की आहट,
नीम भुला अपनी कडवाहट-
करने व्याधि का अंत।५।
भारतीय नवसंवत्सर,
आ गया सत्वर-
'मिश्रअणु' पा अनंत।६।
---:भारतका एक ब्राह्मण.
संजय कुमार मिश्र 'अणु'
वलिदाद अरवल (बिहार)
दिव्य रश्मि केवल समाचार पोर्टल ही नहीं समाज का दर्पण है |www.divyarashmi.com
0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com