हम समझते हैं हम बहुत पढ़े लिखे हो गए, सोचते हैं कि हमने बहुत बड़ा तीर मार लिया और हम महान हो जाएंगे। धिक्कार है इस सोच पर।
स्वामी रामदेव जी के बारे में अनेक देशवासी स्वजन कुछ न कुछ लिखते और बोलते रहते हैं। उसमें कुछ सराहना होती है तो कुछ आलोचना भी। यद्यपि उनके कुछ असत्य तथ्यों को लेकर मैं भी उनका आलोचक बना हूँ, जैसे अपने जीवन पर बनी फिल्म में अपने पैतृक गांव की पुरानी झूठ बातें डलवाना तथा सन्त वेश में नाम के पहले स्वामी लगाकर दिल का उतना साफ व्यक्ति न बन पाना, तथापि योग एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके और आचार्य बालकृष्ण जी के योगदान का मैं प्रशंसक हूँ। हमारी तरह अनेक देशवासी उनके योगनिष्ठ सक्रिय जीवन एवं अनूठे कर्तत्वों की खुलकर सराहना करते हैं।
आज अखिल भारतीय विज्ञान दल के वाट्सएप समूह में नीचे लिखी पोस्ट को हमने पढ़ा तो हृदय गदगद हुआ। मैं इसमें लिखे एक-एक वाक्य से सहमत हूँ और भारत के शुभचिंतक हर नर-नारी से आग्रह करता हूँ कि इसका एक-एक शब्द ध्यान से पढ़ें, गुनें, मनन करें तथा स्वदेश व स्वदेशी की भौड़ी आलोचना से प्रयासपूर्वक बचें, यह राष्ट्रहित में होगा-
...क्या पतंजलि ने बंदूक की नोक पर आप को लूटा? क्या आचार्य बालकृष्ण ने आपकी जेब काटी? क्या आचार्य जी ने समोसा, चटनी, ताबीज, भभूत के नाम से आपको उल्लू बनाया? क्या 200 देशों में योग पहुंचाकर रामदेव जी व पतंजलि ने हाफिज सईद व दाऊद इब्राहिम जैसा गुनाह व वैश्विक अपराध किया है ?
क्या मदर टेरेसा जिनको जीते जी चमत्कारी संत घोषित किया गया, जो छूकर बीमारी ठीक कर देती थीं, वह भी हॉस्पिटल में भर्ती नहीं हुईं और वहीं उनका निधन हुआ, उस पर आपने कभी सवाल उठाया? क्या आचार्य बालकृष्ण या बाबा रामदेव ने खुद को भगवान, गॉड या अवतार घोषित किया?
क्या हॉस्पिटल खोलना, अनाथालय खोलना, विद्यालय व विश्वविद्यालय चलाना, अद्वितीय गुरुकुलों का संचालन करना, धर्मशाला बनाना, शहीदों को सम्मानित करना, लंगर चलाना, किसानों के खेत से जड़ी-बूटियां खरीदकर मिलावट रहित चीजें बनाकर पाप किया है?
क्या आचार्य बालकृष्ण जी ने विजय माल्या, नीरव मोदी की तरह देश को लूटने का अपराध किया है? आप सालों तक अपनी जेब कटवाकर फेयर एंड लवली रगड़ते रहे, क्या आप गोरे हुए?
*इस पतंजलि का पाप केवल यह है कि इसने कोलगेट जो नीम, तुलसी, वेद, रामायण, महाभारत को नहीं मानती थी, हम हड्डियों का चूर्ण दांतों पर रगड़ते थे, क्या उस 80 साल पुरानी कोलगेट को इन्हीं धोती और बनियान पहनने वाले आचार्यश्री ने 'वेदशक्ति' बनाने को मजबूर नहीं कर दिया? पर उससे आपको कोई दिक्कत नहीं। शायद हिंदुस्तान, यूनिलीवर, कोलगेट, नेस्ले ये सब आपकी अपनी कंपनियां हैं?
*क्या आपने कभी ये सवाल उठाये? -
जब 2000 साल पहले महर्षि सुश्रुत 100 प्रकार की सर्जरी कर सकते थे, तो आज भारत में आयुर्वेद में सर्जरी के ऊपर अनुसंधान क्यों नहीं होता?*
आज भारत में एलोपैथी के ऊपर सारा बजट क्यों खर्च किया जाता है ?
क्या आपने कभी कश्मीर में पत्थरबाजी करने वाले आतंकवादियों पर सवाल उठाया?
क्या आपने आंखों के किसी डॉक्टर को चश्मा लगाकर इलाज करते देखकर उसके ऊपर कभी सवाल उठाया?
क्या हमने देश के अंदर लाखों विदेशी कंपनियां जो लूट मचा रही हैं उस पर कभी सवाल उठाया ?
जॉनसन एंड जॉनसन के ऊपर अमेरिका में पाउडर से कैंसर होने पर 32000 करोड़ रुपये का जुर्माना किया गया, क्या आपने कभी इसकी चर्चा की। शायद इस पर आपको यकीन ना हो तो गूगल कर लो। क्या आपने कभी पोस्ट डाली कि भारत में जानसन को बैन किया जाए?
याद रखिये हम यह विरोध करके पतंजलि का नहीं बल्कि अपने देश भारत का भारी नुकसान कर रहे हैं?
*लाला लाजपत राय ने कहा था कि पूरी दुनिया में केवल भारतीय हिंदू ही ऐसी कौम है जो अपने महापुरुषों, अपने व्रत, त्योहारों, परंपराओं, संस्कृति और देवी-देवताओं को गाली देकर और उनका अपमान करके गर्व महसूस करते हैं?*
हम इतने समझदार हो गए हैं कि अपने महापर्व होली पर, दीपावली पर, करवाचौथ पर, रक्षाबंधन पर, यहां तक कि अपने भगवान श्रीकृष्ण पर, भक्तराज हनुमान पर चुटकुले बनाकर, उनका मजाक करके, उपहास बनाकर उनके ऊपर पोस्ट वायरल करते हैं। हम समझते हैं हम बहुत पढ़े लिखे हो गए, सोचते हैं कि हमने बहुत बड़ा तीर मार लिया और हम महान हो जाएंगे। धिक्कार है इस सोच पर।
अगर आप पतंजलि को, बाबा रामदेव को, आचार्य बालकृष्ण को गाली देकर तीस मार खां बन सकते हैं, तो बन जाइये। अगर आपको लगता है कि इससे आपको भारतरत्न मिल जायेगा, आप परमवीर बन जायंगे तो आप जरूर कीजिये, खूब कीजिये। लेकिन, ध्यान रखिये, इतिहास आपको माफ नहीं करेगा, आपकी पीढ़ियाँ आपको सदियों तक कोसेंगी।*इसलिए एक बार विचार करें कि इससे क्या होगा? किसका फायदा होगा? हम किसके मोहरे बन गए।
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