दिव्य रश्मि ने मनाया अपना वार्षिकोत्सव सह सावरकर जी का जन्मोत्सव |
आज गूगल मिट के माध्यम से दिव्य रश्मि के पत्रकारों
ने मनाया अपना सातवा स्थापना दिवस | इस अवसर पर बोलते हुए मसहुर साहित्यकार डॉ
सच्चिदानंद प्रेमी ने कहाकि भारतीय संस्कृति ,संस्कार ,सहित्य एवं शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को पर्यावरणीय गुणों से मर्यादित कर
स्वराष्ट्र से परराष्ट्र तक परोसने वाली यह दिव्यरश्मि मासिक पत्रिका सात वर्षों से अविरल सेवा में समर्पित है ।साहित्य
और संस्कृति के विविध आयामों के अनछुए पहलुओं को उजागर करने के साथ विश्व ख्याति
लब्ध लेखकों ,रचनाकारों ,कवियों
भाषाविदों को अपने आगोश में समेटे विकास के उत्तुंग शिखर पर अविरल विराजमान हो रहा
है ।भारतीयता के रंग से सम्पूर्ण राष्ट्र को रंगने के इसके प्रयास प्रसंसनीय रहे
हैं। इसके लेख शिक्षाप्रद तो होते ही हैं मार्गदर्शक भी होते हैं ।कुल मिला कर
पत्रिका संग्रहनीयता गुणों से सम्पन्न है ।कम ही दिनों में इसने साहित्य जगत के
विस्तारित आसमान में अपना स्थान सुरक्षित कर रखा है ।
इसके संपादक संपादन कला में निष्णात संपादकीय गुणों के पुरोधा साहित्य के
सजग प्रहरी शिक्षा के सूत्र विनायक डॉ राकेश भारतीय जी ने इसके विकास में कुछ उठा
नहीं रखा है ।इस कोरोना काल के महामारी- विसात पर भी अपने पठकों को वार्षिक कार्यक्रम से निरास नहीं होने दिया है ,यह स्तुत्य है ,प्रशंसनीय है ।
अधिवक्ता डॉ अजित पाठक ने कहाकि पत्रिका कभी
पुराणी नहीं होनेवाली पत्रिका है इसे परिवार के सभी लोगों के साथ बैठ कर पढ़ा जा
सकता है |
संपादक डॉ राकेश दत्त मिश्र ने कहा कि बिहार में
धार्मिक पत्रिका का आभाव है इस वास्ते हमने इस पत्रिका का प्रकाशन सावरकर जी के
जन्मदिवस के अवसर पर किया|
शशांक शेखर ने कहाकि स्थापत्य काल से पत्रिका
अपने गुणों के अनुरूप लोगों में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य कर रही है |
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