सेना समाप्त हुई , किले की दिवारे झरने लगी ..
निश्चय ने निर्णय लिया, साहस फिर जगने लगी..
सूचना को होगा छिपना, जीभ को लगाव फांसी..
अभी और रक्त शीश , मांग रही है झाँसी..
रण छोडे़ रानी चिंता न करे , बेताली बवाल की ..
दर्शनार्थ बुलाया है महाकाल ने,काली को कालपी..
लेगा जिम्मेवारी कौन, होगी कौन मृत्यु की मतारी..
तब बना कर बाना , स्वयं गिरफ्तार हुई झलकारी..
चकित हुए अंग्रेज , देखे एक अक्स के दो दर्पण..
भारी आश्चर्य , रण में रणचंडी का आत्मसमर्पण..
समझ पाते जब तक झलकारी को , बुद्धि घायल ..
स्वयं को रानी कहते चिल्लाते देख ,सब कहे पागल ..
तब बोला अंग्रेज अफसर , हर बुद्धि मोड़ना होगा ..
महिलायें ऐसे पगलाई तो, हमें इंडिया छोड़ना होगा .. !!
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,विनयबुद्धि
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