जागृत तो रहना होगा
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तूफानों का दौर प्रबल है
जागृत तो रहना होगा,
पेड़ बबूल लगाए हैं तो
काँटों को सहना होगा।
सिसक रही मानवता है जो
दुख दर्द हरना होगा,
रीति नीति गर घायल है
मरहम पट्टी करना होगा।
कट्टरता की तेज है आँधी
क्या घुट कर जीना होगा,
वीर शिवा की है भूमि यह
साहस तो भरना होगा।
हिंसा की जो आग जल रही
म्लेक्ष शत्रु जलना होगा,
भारत की पावन गंगा को
सरहद पर बहना होगा।
आँख दिखाती कायरता अब
साहस को जगना होगा,
भारत माता तेरी जय हो
अरिदल को कहना होगा।
रजनीकांत।©
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