नारी का यह जीवन भारी
नारी का यह जीवन भारी
देखे जग ,संसार, परिवार
जीवन नैया को पार करेगा
कौन बनेगा नाविक पतवार
नारी जीवन व्यथित है घर- घर
हृदय की स्थिति है जर- जर
सदियों से चलता यह क्रम है
जाने ना कोई ये मर्म है।
डा. जयन्ती कुमारी
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