विकास के नाम पर विनाश का खेल क्यों??
विकास के नाम पर देश की सरकार ने सबकुछ बर्बाद करके आदमी को मौत के मुंह में धकेलने का काम किया। है। विकास के नाम पर विनाश और बर्बादी का तांडव अब भी जारी है।
ऑक्सीजन के विशाल भंडार तथा आयुर्वेदिक औषधीय गुणों से भरपुर पीपल, वटवृक्ष बरगद, पाकड़, वसाका बाकस, अर्जुन, अमलतास, जामुन, आम, ईमली, बबूल के हजारों पेड़ हमारे क्षेत्र में कैंट रोड के दोनों किनारे पर सड़क किनारे लगे हुए थे 5 किलामीटर की लंबाई में दानापुर रेलवे स्टेशन से सगुना मोड़ बेली रोड तक ।
सड़क के दोनों तरफ हरेभरे विशालकाय वृक्षों की छाया में कैंट रोड पर चलते समय ऐसा लगता था जैसे किसी हरियाली की गुफा के अंदर चले जा रहे हैं।
कैंट रोड के पक्की सड़क के दोनों तरफ काफी चौड़ी कच्ची सड़क पर दूब घास की हरियाली होती थी जिसपर जून की दोपहर वाली धूप की गर्मी में भी नंगे पाँव लोग आसानी से 2-4 किलोमीटर चल लेते थे।
कैंट रोड के किनारे स्थित विश्वप्रसिद्ध वेदरत्न विद्यालय गुरूकुल परिसर मुस्तफापुर से सगुना मोड़ तक 4 किलोमीटर की लंबाई में सड़क के दोनों तरफ करीब 40 फीट चौड़ा हंडल में पानी भरा रहता था तथा उसके अतिरिक्त हर तरफ आहर पोखर जलाशय से पूरा इलाका में सालों भर पानी जमा रहता था जिससे पूरा इलाका का जलस्तर मेंटेन रहता था और कृषि के लिए सिंचाई की आसान व्यवस्था हो जाती थी।
हमारे घर के सामने एक एकड़ क्षेत्र में लगाये गए सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक बागीचा के बीच स्थित कुआँ में हमलोग बिना रस्सी के केवल हाथ से बाल्टी डुबाकर पानी निकाल लेते थे।
विश्वप्रसिद्ध वेदरत्न विद्यालय गुरूकुल, वेदरत्न आयुर्विज्ञान संस्थान, वेदरत्न योगविज्ञान संस्थान, वेदरत्न धर्मअर्थन्यायविधिविज्ञान संस्थान, सिंचाई अनुसंधान संस्थान, दानापुर रेलमंडल कार्यालय, सुप्रसिद्ध शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर, महावीर मंदिर तथा चारों तरफ हरियाली और जलाशय से भरा हुआ हमारा पूरा इलाका स्वर्ग जैसा सुंदर क्षेत्र था। हमारा यह क्षेत्र अत्यंत प्राचीनकाल से प्राचीन कुसुमपुर के नाम से विश्वप्रसिद्ध गुरूकुल शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र रहा है।
प्राचीन पाटलिपुत्र से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन कुसुमपुर का यही क्षेत्र प्राचीन भारत के सुप्रसिद्ध तीन प्रधानमंत्री (1) आर्य शकटार (2) अमात्य राक्षस मुद्रा राक्षस (3) आचार्य चाणक्य की जन्मस्थली रही है।
प्राचीन कुसुमपुर का यही क्षेत्र पांचवीं शताब्दी के महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि रही है। प्राचीन कुसुमपुर के मध्य भाग में में आर्यभट्ट की खगोलीय वेधशाला (Astronomical Observatory) स्थित होने के कारण बड़ी छोटी एवं चक्रीय खगोलीय वेधशाला का स्थान बड़ी खगौल, छोटी खगौल एवं चक्रदाहा के नाम से आजतक प्रसिद्ध है।
प्राचीन कुसुमपुर का यह सम्पूर्ण क्षेत्र ईसापूर्व काल से 2012 ई0 तक स्वर्ग जैसा सुंदर हराभरा क्षेत्र बना हुआ था।
परंतु अभी हाल में विकास के नाम पर कैंट रोड का चौड़ीकरण करके 8 लेन रोड बना दिया गया तथा सड़क के दोनों तरफ लगे हुए विशालकाय वृक्ष पीपल, वटवृक्ष बरगद, वसाका बाकस, पांकड़, अर्जुन, अमलतास, जामुन, आम, ईमली, बबूल आदि के समस्त हजारों हरेभरे वृक्ष काट डाले गए।
विकास के नाम पर दानापुर रेलवे स्टेशन के सामने पश्चिमी किनारे पर बने सैकड़ों वर्ष पुराना सुप्रसिद्ध भूतनाथ मंदिर के नाम से विख्यात शिवमंदिर को पुलिस की घेराबंदी करके रातोंरात ढाह दिया गया। सड़क चौड़ीकरण के लिए कैंट रोड के किनारे स्थित मुस्तफापुर का महावीर मंदिर हनुमान मंदिर भी तोड़ दिया गया।
विकास के नाम पर देश की सारी हरियाली समाप्त कर दी गई। हजारों पुराने विशालकाय हरेभरे वृक्ष काट डाले गए। आहर पोखर तालाब हंडल सहित समस्त जलाशय के जलस्रोत समाप्त कर दिए गए। विकास के नाम पर बड़े विशाल प्राचीन मंदिरों को ढाह दिया गया।
देश के विश्वप्रसिद्ध गुरूकुल की व्यावहारिक वैज्ञानिक सम्पूर्ण सार्थक गुरूकुल शिक्षा पद्धति के पाठ्यक्रम सिलेबस की सरकारी मान्यता स्वतंत्रत भारत की सरकार द्वारा समाप्त कर दी गई।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्वतंत्र भारत की सरकारों द्वारा भारतीय सभ्यता संस्कृति को नष्ट भ्रष्ट करने की साजिश रचकर गुरूकुल शिक्षा, गुरु परम्परा और वंश परम्परा को समाप्त करा दिया गया। आजतक गुरूकुल शिक्षा बोर्ड की स्थापना नहीं होने दिया गया।
मॉडर्न एडुकेशन के नाम पर लॉर्ड मैकॉले की अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के पोषण प्रोत्साहन हेतु स्थापित सीबीएसई की सेंट्रल एडुकेशन बोर्ड तथा हर राज्य में स्थापित स्टेट एडुकेशन बोर्ड द्वारा केवल बुद्धिभ्रष्ट धर्मभ्रष्ट महाधूर्त महास्वार्थी महादुष्ट प्रवृत्ति के विकृत मानसिकता से ग्रस्त अत्यंत कमजोर सुविधाभोगी नया जेनरेशन तैयार किया जा रहा है। दूसरी तरफ सरकारी खर्च पर मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित इसलामी शिक्षा के पोषण प्रोत्साहन हेतु स्थापित मदरसा में प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपया के सरकारी खर्च पर बुद्धिभ्रष्ट धर्मभ्रष्ट महाधूर्त महादुष्ट प्रकृति के विकृत मानसिकता से ग्रस्त मुस्लिम मज़हबी आतंकवादी तैयार किये जा रहे हैं जो देशभर में आये दिन दंगा फसाद, हत्या बलात्कार, नरसंहार, उग्रवाद आतंकवाद की घटना को अंजाम देते रहते हैं।
धर्मभूमि भारत में मज़हबी फसाद खड़ा करके भारतीय सभ्यता संस्कृति और धर्म व्यवस्था को नष्ट भ्रष्ट करके स्वतंत्र भारत की सरकार इस देश को नरक बनाती जा रही है। चारों तरफ कचरा का अंबार लगा हुआ है। जल थल वायु सबकुछ लगातार प्रदूषित किया जा रहा है। मॉडर्न एडुकेशन के नाम पर देश की जनता को बुद्धिभ्रष्ट, धर्मभ्रष्ट, महाधूर्त, महास्वार्थी,
विकास के नाम पर नरक बना दिये गए विश्वप्रसिद्ध प्राचीन कुसुमपुर के इस क्षेत्र में भी अब हालत यह है कि पूरा इलाका का जलस्तर काफी नीचे भाग गया है तथा वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अत्यंत भीषण प्रचंड गर्मी से पूरा इलाका के सभी लोग परेशान रहते हैं। जलप्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात में चारों तरफ रिहायशी क्षेत्र में लोगों के घर के चारों तरफ गन्दा पानी भर जाता है। गर्मी में कहीं पानी नजर नहीं आता है। प्रचंड गर्मी से सबका हालत खराब रहता है। मात्र 5 फ़ीट जमीन खोदने पर पानी निकलने वाले क्षेत्र में अब हालत यह है कि सबमर्सिबल मोटर के बिना बोरिंग से पानी मिलना मुश्किल है। सबका जीवन कष्टमय हो गया है।
अब विभिन्न प्रकार की गम्भीर बीमारी से ग्रस्त होकर मौत के मुँह में जाते लोग जीवनदायिनी स्वच्छ पानी, स्वच्छ हवा और ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं।
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