जे॰पी॰ सत्ता में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहते थे- राज्यपाल
‘‘लोकनायक जयप्रकाश नारायण को सत्ता का मोह कभी नहीं था। वह सत्ता में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहते थे।‘‘-यह बातें महामहिम राज्यपाल श्री फागू चैहान ने जय प्रकाश नारायण अध्ययन केंद्र, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के तत्वावधान में प्रसिद्ध चिंतक, समाजवादी नेता और प्रखर वक्ता लोकनायक जयप्रकाश नारायण प्रथम व्याख्यानमाला के उद््घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही।
राज्यपाल ने 5 जून, 1975 को जे॰पी॰ द्वारा दिए गये महत्वपूर्ण भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी आदि बुराइयों को व्यवस्थाजनित मानते थे तथा संपूर्ण क्रांति के माध्यम से व्यवस्था में परिवर्तन लाकर इन्हें दूर करने के पक्षधर थे।
उन्होंने कहा कि जे॰पी॰ गाँधीजी के सच्चे अनुयायी थे, जिन्होंने उनके जीवन दर्शन को केवल आत्मसात ही नहीं किया, बल्कि समय के साथ उसका प्रकटीकरण भी किया। गाँधीजी के प्रभावस्वरूप उनके विचारों में मौलिक परिवर्तन आये तथा उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़कर देश सेवा का व्रत लिया। परंतु भारतीय जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया। भारतीय जनमानस के प्रति उनकी इस गहरी निष्ठा और आस्था ने ही उन्हें लोकनायक बनाया। उन्होंने कहा कि गाँधीजी ने जयप्रकाश जी को भारतीय समाजवाद का आचार्य कह कर सम्मानित किया था।
राज्यपाल ने कहा कि जे॰पी॰ के लिए देश ही सर्वाेपरि था। आज भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के नवीनतम अग्रदूतों में उनकी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि जीवन और राजनीति के विविध आयामों में उनके विचार लगातार हमारा मार्गदर्शन कर रहें हैं।
राज्यपाल ने जे॰पी॰ व्याख्यानमाला को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि देश की अन्य विभूतियों यथा-महात्मा गाँधी, विनोबा भावे, राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय आदि पर भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे ज्ञान का सार्वभौमीकरण होगा तथा युवा पीढ़ी को देश के महापुरुषों के जीवन चरित्र से सीखने का अवसर भी प्राप्त होगा।
राज्यपाल ने कहा कि देश की आजादी के अमृत महोत्सव के माध्यम से हम भारत के महापुरुषों, धरोहरों और आजादी से जुड़े प्रतीकों का पुनः स्मरण कर रहे हैं। इससे जनमानस में राष्ट्रीयता की भावना जागृत होगी तथा लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की पे्ररणा मिलेगी।
वीडियो काॅन्फ्रेंन्सिंग के जरिए राजभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यसभा के माननीय उप सभापति श्री हरिवंश नारायण, राज्यपाल के सचिव श्री राॅबर्ट एल॰ चोंग्थू, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो॰ फारूक अली, प्रतिकुलपति प्रो॰ लक्ष्मी नारायण सिंह एवं कुलसचिव डाॅ॰ रवि प्रकाश बबलू, बिहार चरखा समिति की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रभावती जी के जीवन चरित्र की लेखिका पद््मश्री प्रो॰ उषा किरण खान, जयप्रभा फाऊण्डेशन, सिताब दियारा, बलिया के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिंह मस्त एवं सचिव श्री आलोक कुमार सिंह तथा अन्य लोग उपस्थित थे।
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