श्रीलंका की अंतरराष्ट्रीय परिषद में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय को ‘सर्वोत्कृष्ट प्रस्तुतकर्ता’ पुरस्कार !
सकारात्मक ऊर्जा प्रक्षेपित करनेवाले धरोहर स्थलों का अवलोकन करना लाभदायक ! - महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के शोध का निष्कर्ष
पर्यटक संसार के अनेक दर्शनीय धरोहर स्थलों का अवलोकन करते रहते हैं; परंतु उन धरोहर स्थलों के अवलोकन का उस व्यक्तिपर क्या परिणाम होता है, इसका हम कभी विचार नहीं करते । इस सन्दर्भ में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक शोध किया है । इस शोध में ध्यान में आया कि, कुछ धरोहर स्थल ऐसे हैं, जहां जानेपर हमें विविध प्रकार के कष्ट प्रतीत होते हैं अथवा हमारी नकारात्मकता बढती है तथा कुछ धरोहर स्थलों का अवलोकन करने पर हमें अच्छा लगता है, वहां से अच्छी अर्थात सकारात्मक ऊर्जा मिलती है । इससे सिद्ध होता है कि सकारात्मक ऊर्जा प्रक्षेपित करनेवाले धरोहर स्थलों का अवलोकन करना हमारे लिए लाभदायक है, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के श्री. शॉन क्लार्क ने किया । वे ‘इंटरनेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ नॉलेज मैनेजमेंट’ द्वारा श्रीलंका में आयोजित ‘द्वितीय अंतरराष्ट्रीय पुरातत्त्व विभाग, इतिहास और धरोहर स्थल 2021’ इस परिषद में बोल रहे थे । श्री. क्लार्क ने ‘धरोहर स्थलों के संबंध में आध्यात्मिक दृष्टिकोण’ यह शोधनिबंध इस परिषद में प्रस्तुत किया । इस शोधनिबंध को इस अंतरराष्ट्रीय परिषद में ‘सर्वोत्कृष्ट प्रस्तुतकर्ता - प्रसारमाध्यम’ यह पुरस्कार मिला ।
महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी इस शोधनिबंध के लेखक तथा श्री. शॉन क्लार्क सहलेखक हैं । महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा अभी तक 15 राष्ट्रीय और 65 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में शोधनिबंध प्रस्तुत किए गए हैं । इनमें से 9 अंतरराष्ट्रीय परिषदों में ‘सर्वोत्कृष्ट शोधनिबंध पुरस्कार’ मिले हैं ।
‘धरोहर स्थलों से संबंधित आध्यात्मिक दृष्टिकोण’ इस शोधनिबंध में धरोहर स्थलों के परिसर के पानी के नमूनों के छायाचित्र तथा धरोहर स्थलों के छायाचित्रों का उपयोग कर यह शोध किया गया । यह शोध प्रस्तुत करते समय श्री. क्लार्क ने पानी से भरे हुए 5 गिलासों का छायाचित्र सबको दिखाया और उनमें से स्वच्छ पानी से भरे हुए 2 गिलास कैसे चुनेंगे, यह बताया । सर्वाधिक स्वच्छ दिखाई देनेवाले एक गिलास का पानी भारत के ताजमहल के परिसर का था और कुछ मटमैला पानी ताजमहल के निकट से बहनेवाली यमुना नदी का था । यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर (यू.ए.एस.) नामक उपकरण द्वारा किए गए परीक्षण में यमुना नदी के पानी में सकारात्मक ऊर्जा दिखाई दी; परंतु ताजमहल के परिसर के पानी में नकारात्मक ऊर्जा दिखाई दी । इसी प्रकार वर्ष 2019 में प्रयागराज में हुए कुंभमेले में राजयोगी (शाही) स्नान के दिन 2 करोड यात्रियों ने पवित्र त्रिवेणी संगम में मंगल स्नान किया था, तब भी उसकी सकारात्मकता एक दिन पूर्व की तुलना में बढ गई थी, यह शोध में दिखाई दिया, ऐसा श्री. शॉन क्लार्क ने बताया ।
किसी भी वस्तु अथवा वास्तु के छायाचित्र में उस वस्तु अथवा वास्तु के सूक्ष्म स्पंदन होते हैं और वे छायाचित्रों से भी प्रक्षेपित होते हैं । यू.ए.एस. उपकरण द्वारा ये सूक्ष्म स्पंदन सकारात्मक हैं अथवा नकारात्मक हैं तथा उनका वलय कितनी दूरी तक है, इसका परीक्षण कर सकते हैं । यू.ए.एस. नामक उपकरण की सहायता से संसार में प्रसिद्ध पांच धरोहर स्थलों और भारत के प्रसिद्ध मंदिरों के छायाचित्रों की सकारात्मकता और नकारात्मकता का परीक्षण किया गया । इस शोध में रोम स्थित ‘कोलोसियम’ के छायाचित्र की नकारात्मकता 433 मीटर, भारत स्थित ‘ताजमहल’ के छायाचित्र की नकारात्मकता 376 मीटर, इंग्लैंड स्थित ‘स्टोनहेन्ज’ के छायाचित्र की नकारात्मकता 348 मीटर, इटली के ‘लीनिंंग टॉवर ऑफ पिसा’ के छायाचित्र की नकारात्मकता 252 मीटर, इजिप्त के ‘पिरामिड्स ऑफ गीजा’ के छायाचित्र की नकारात्मकता 216 मीटर दिखाई दी । यू.ए.एस. उपकरण का उपयोग कर अभी तक परीक्षण की गई यह सर्वाधिक नकारात्मकता है । उपरोक्त में से एक भी धरोहर स्थल में सकारात्मक ऊर्जा नहीं मिली । इसी प्रकार आंध्रप्रदेश के तिरुपती बालाजी मंदिर के छायाचित्र का भी शोध किया गया । इस छायाचित्र में सकारात्मक ऊर्जा का वलय 271 मीटर था तथा नकारात्मक ऊर्जा नहीं थी । सकारात्मक स्थल सकारात्मकता आकर्षित करते हैं । इसलिए वे मंगलमय होते हैं । इसलिए जहां तक संभव हो नकारात्मकता प्रक्षेपित करनेवाले धरोहर स्थलों का अवलोकन नहीं करना चाहिए, ऐसा निष्कर्ष इस शोध से निकलता है ।
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