सीएम को पुलिस की क्लीन चिट
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
हरियाणा के मुख्यमंत्री को दिल्ली की पुलिस ने एक मामले मंे क्लीन चिट दी है। शासन-प्रशासन की यह प्रक्रिया है लेकिन कहीं न कहीं तो खटकती है। विशेष रूप से यह कि हरियाणा मंे भाजपा की सरकार है और दिल्ली पुलिस भी केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। केन्द्र मंे भी भाजपा की ही सरकार है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटृटर ने जिस किसान आंदोलन को लेकर विवादास्पद बयान दिया था, इसका मुख्य मुद्दा भी खत्म हो गया है। केन्द्र सरकार ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। किसान संगठन के नेता कुछ मामलों को लेकर अभी आंदोलन को समाप्त नहीं कर पाये हैं, इसलिए किसान आंदोलन से जुड़े मामलों को भड़काने की भी जरूरत नहीं है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के बयान देने की मर्यादा रेखा को बनाए रखना भी जरूरी है। अभी इस मामले मंे अदालत की कार्यवाही चलेगी। अदालत से मुख्यमंत्री को कम से कम चेतावनी तो मिलनी चाहिए कि जिम्मेदारी की कुर्सी पर बैठकर इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
एक वीडियो में किसानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में क्लीन चिट दे दी है। दिल्ली की एक अदालत में दायर स्टेट्स रिपोर्ट में पुलिस ने हरियाणा के सीएम को क्लीन चिट दी। जांच एजेंसी का कहना है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत करने के लिए 21 दिसंबर की तारीख तय की है। राउज एवेन्यू कोर्ट के एसीएमएम सचिन गुप्ता के समक्ष दायर स्टेट्स रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कहा कि शिकायत की सामग्री और संलग्न वीडियो की जांच में पाया गया कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। साथ ही जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया कि यह वीडियो चंडीगढ़ में रिकॉर्ड किया गया, जोकि दिल्ली के ज्यूरिडिक्शन में नहीं आता। लिहाजा, उचित जांच के आधार पर जांच पूरी करते हुए उसे बंद किया जाता है। पिछले दिनों वायरल हुए एक वीडियो में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक बैठक में बीजेपी कार्यकर्ताओं से आंदोलनरत किसानों के खिलाफ लठ्ठ उठा लेने और ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाने सरीखी बातें कहते नजर आए थे। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील अमित साहनी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में इस बाबत अर्जी दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा, हरियाणा के मुख्यमंत्री का 03-10-2021 को चंडीगढ़ में अपने आवास पर भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कहते नजर आए, ‘कुछ नए किसानों के जो संगठन और उभर रहे हैं, उनको भी प्रोत्साहन देना पड़ेगा, उनको आगे चलाना पड़ेगा। और अगर हर जिले में खासकर उत्तर और पश्चिम हरियाणा के, दक्षिण हरियाणा में ये समस्या ज्यादा नहीं है, लेकिन उत्तर और पश्चिम हरियाणा के हर जिले में अपने किसानों के 500, 700, 1000 लोग आप लोग अपने खड़े करो, उनको वॉलंटियर बनाओ’। वह आगे कहते हैं, ‘और फिर जगह-जगह ‘सठे साठयम समाचरेत’, (पूछते हैं क्या अर्थ होता है इसका), अंग्रेजी में बता दिया ना हिंदी में बताओ, यानि जैसे को तैसा। ठा लो डंडे, ठीक है’। उन्होंने अर्जी में आगे कहा कि वीडियो में मुख्यमंत्री खट्टर आगे कहते दिखे कि ‘नहीं वो देख लेंगे और दूसरी बात ये है कि जब उठा लोगे डंडे तो जमानत की परवाह मत करो। छह महीने, दो महीने जेल में रह आओगे ना, तो इतनी पढाई इस मीटिंग में नहीं होगी, दो-चार महीने वहां रह आओगे तो अपने आप बड़े लीडर बन जाओगे। नहीं, नहीं दो चार महीने में अपने आप बड़े नेता बन जाओगे। चिंता मत करो, ये इतिहास में नाम लिखा जाता है। इसमें एक ही बात ध्यान रखनी है जोश के साथ अनुशासन को बनाकर रखना है। जो सूचना मिल गई, यहां तक करना है, इसके आगे नहीं करना, तो नहीं करना’। अर्जी में कहा कि उपरोक्त वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा राज्य के मुखिया अपनी पार्टी के सदस्यों को किसानों के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसा रहे हैं। इससे पहले ही हरियाणा के एक आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा ने किसानों के “सिर फोड़ने” का एक विवादित बयान दिया था। एडवोकेट अमित साहनी ने याचिका में कहा, ‘मुख्यमंत्री खट्टर के बयान का लहजा और तरीका स्वतः स्पष्ट है और उन्हें संवैधानिक पद पर होने के कारण दुश्मनी, नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस वीडियो में इस तरह की अभद्र भाषा और मौजूदा मुख्यमंत्री जैसे सरकारी पदाधिकारी द्वारा अपनी पूरी क्षमता से उकसाने से आंदोलन तेज हो सकता था और दिल्ली और एनसीआर में कानून-व्यवस्था खराब होने की स्थिति पैदा हो सकती थी। मीडिया रिपोर्टों से यह भी पता चला कि वीडियो में उनकी भाषा के बाद विभिन्न सामाजिक हलकों में अशांति फैल गई थी’।
हालांकि सीएम के सुर भी बदल गये हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि एमएसपी को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से एक कमेटी बनाई जा रही है। खट्टर ने कहा कि इस कमेटी के जरिए किसानों की मांगों पर विचार किया जाएगा।
अपनी सरकार को लेकर खट्टर ने कहा- भ्रष्टाचार शून्य होना तो संभव नहीं है, लेकिन इसे कम किया जा सकता है और हमने हरियाणा में भ्रष्टाचार कम किया है, जिसके लिए सीएम समेत सभी लोगों के विशेषाधिकार खत्म कर दिए गए। नौकरियों के इंटरव्यू और ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार की बड़ी वजह विशेषाधिकर ही थे। किसानों ने खट्टर का सम्मान किया है।
केंद्र सरकार द्वारा छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने तथा हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने का भाव देश में सर्वाधिक देने की घोषणा करने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के नेतृत्व में राज्यभर के सैंकड़ों किसान मुख्यमंत्री मनोहर लाल का धन्यवाद करने चंडीगढ़ पंहुचे। कृषि एवं किसानों के हित में सरकार द्वारा उठाए गए एक के बाद एक कई कदमों से प्रफुल्लित किसानों ने गन्नों के पौधों तथा बाजरे के सिरटों से बने हुए ‘बुक्के’ देकर मुख्यमंत्री का सम्मान किया। इसके अलावा स्वयं किसानों ने मुख्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को लड्डू खिलाकर उनका ‘मुंह मीठा’ करवाया।
किसानों ने सिरोपा व पगड़ी पहनाकर मुख्यमंत्री का आभार जताया। प्रदेशभर के किसानों द्वारा जिंदादिली से सम्मान करने पर गदगद हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की कि गन्ना का भाव हमने पहले भी बढ़ाया है, इस बार भी बढ़ाया है और अगले वर्ष फिर बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी गन्ना मिल में किसान के गन्ना का पैसा नहीं मरने देंगे, उनको बिल्कुल भी नुकसान नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य ने चुनाव को नजदीक देख चार साल बाद गन्ने का भाव बढ़ाया है जबकि हम बिना चुनाव भी किसानों के गन्ने का भाव बढ़ाते आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बुवाई से काफी पहले घोषित करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का विजन वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुणी करने का है। उसी सोच के अनुरूप ही प्रधानमंत्री ने छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय देश और प्रदेश में किसान हितैषी सरकारें हैं। इसी के चलते किसानों को उनकी फसलों के बेहतर भाव दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की यही भावना उनके बयानों मंे दिखनी चाहिए। (हिफी)
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