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पीएलसी को आगे रखेंगे कैप्टन!

पीएलसी को आगे रखेंगे कैप्टन!

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
पंजाब मंे विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक समीकरण लगभग बन गये हैं। कभी अकाली दल के पीछे चलने वाली भाजपा इस बार तीन दलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी। इनमंे एक नयी पार्टी है जिसे कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तैयार किया है। इस पार्टी के साथ उन्हांेने कांग्रेस का नाम जोड़ कर रखा है। कैप्टन की पार्टी का नाम है पंजाब लोक कांग्रेस अर्थात् (पीएलसी) इस पार्टी के साथ सुखदेव सिंह ढींढसा की संयुक्त अकाली दल पार्टी है। इन दोनों के साथ भाजपा चुनाव लड़ेगी। हालांकि अभी शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने पत्ते नहीं खोले हैं। कैप्टन का प्रयास होगा कि उनकी पार्टी पीएलसी आगे रहे। इसीलिए उन्होंने सुखदेव सिंह ढींढसा का हाथ थामा है लेकिन भाजपा भी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी-बादल) को साथ लेकर मोर्चे की अगुवाई कर सकती है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पंजाब मंे इस सियासत को मंजूरी दे चुके हैं। कैप्टन अमरिंदर और ढींढसा का साथ किसान आंदोलन के विपरीत प्रभाव को कम कर सकेगा। 
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गत दिनों चंडीगढ़ में अपनी नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) के कार्यालय का उद्घाटन किया है। इस दौरान अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने की बात भी कही। पत्रकारों से बात करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी पंजाब लोक कांग्रेस बीजेपी के साथ मिलकर पंजाब चुनाव लड़ेगी और गठबंधन की घोषणा जल्द ही की जाएगी। पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी, सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी और बीजेपी के बीच सीट बंटवारे पर बात होगी। मैं आपको अभी सटीक संख्या नहीं बता सकता हूं। वहीं जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार होने की उम्मीद है? इस पर अमरिंदर सिंह ने कहा कि सभी गठबंधन मिलकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला करेंगे। कांग्रेस पार्टी के नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मतभेद होने के कारण अमरिंदर सिंह ने कुछ महीने पहले ही कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाने की घोषणा की थी। इतना ही नहीं अमरिंदर सिंह लगातार बीजेपी के नेताओं के संपर्क में भी थे और कई जाने माने बीजेपी के नेताओं से मुलाकात की थी। तभी से ये कहा जा रहा था कि अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को अमरिंदर सिंह बीजेपी के साथ मिलकर लड़ सकते हैं। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है। 
कैप्टन ने कहा कि हमारा उद्देश्य पंजाब विधानसभा चुनाव जीतना है और हम जीतेंगे। उन्होंने पार्टी कार्यालय का उद्घाटन करने से पहले वाहेगुरु जी का आशीर्वाद लिया। कैप्टन ने ट्वीट किया कि पंजाब की समृद्धि और सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की, क्योंकि मैं अपने राज्य और इसके लोगों के कल्याण के लिए काम करना जारी रखने का संकल्प लेता हूं। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) और टकसाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के संयुक्त अकाली दल के साथ गठबंधन का स्पष्ट संकेत दिया था। यह पहला अवसर है जब भाजपा की तरफ से कैप्टन और ढींढसा के साथ चुनावी गठबंधन करने पर खुलकर बयान दिया गया है। कैप्टन पहले ही कह चुके हैं कि वे भाजपा के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। नई दिल्ली में अमित शाह ने एक बयान में कहा था कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह और पूर्व शिअद नेता सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ बातचीत जारी है और उम्मीद है कि दोनों के साथ बात बन जाएगी। शाह ने विपक्ष के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि किसान आंदोलन का असर यूपी और पंजाब के चुनावों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब कोई मुद्दा ही नहीं बचा है।
अब इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब को बांटने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह और ढींढसा का सहारा लेगी लेकिन पंजाब के लोग उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने किसान विरोधी एजेंडे में अकाली दल का प्रयोग तीन कृषि कानूनों को लागू करने में किया। धर्मनिरपेक्ष किसान संघर्ष ने मोदी को इन्हें रद्द करने पर मजबूर कर दिया। शिरोमणि अकाली दल ने इन कानूनों का समर्थन किया था। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा के नापाक जनविरोधी मंसूबों को लागू करने के लिए पक्के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। चन्नी ने कहा कि अकाली दल ने दशकों से संघीय ढांचे के हिमायती होने के बावजूद भाजपा की केंद्रीकरण और सांस्कृतिक समरूपता की नीतियों को पूरा समर्थन दिया। पंजाब के हित पहले अकाली दल की तरफ से प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में भाजपा के पास गिरवी रखे गए, जिन्होंने 1996 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार, जो सिर्फ 13 दिन चली थी, बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी को बिना शर्त समर्थन देकर इस गठजोड़ के लिए रास्ता साफ किया था। बादल ने बिना शर्त समर्थन देकर पंजाब और पंजाबियों के साथ धोखा किया था। इस तरह कर बादल ने पंजाब का सौदा ही किया था।
कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि कैप्टन पहले भी भाजपा के थे। वह मुख्यमंत्री होते हुए अहम मुद्दों पर मोदी सरकार का बचाव करने और जनविरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्रिय रहे। अब इस द्वेषपूर्ण भूमिका को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कैप्टन की अब तक भाजपा की हर तरह से मदद करने में निभाई गई भूमिका को देखकर कोई हैरानी नहीं है कि वह भाजपा के सहयोगी के तौर पर शिरोमणि अकाली दल का विकल्प बनेंगे। पंजाब विधानसभा चुनाव में चंद महीने ही बचे हैं। सभी दल अपनी-अपनी तैयारी में जुट गए हैं। इस बीच जनता का मूड कैसा है, पंजाब में किस पार्टी की सरकार बन सकती है? किसे कितनी सीटें मिलती दिख रही हैं या पंजाब में बड़ा चुनावी मुद्दा क्या है? इन सब सवालों के जवाब के लिए एबीपी-सी वोटर ने पंजाब में प्री-पोल ओपिनियन सर्वे किया है। ओपिनियन सर्वे के नतीजों में पंजाब में इस बार कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है जबकि आम आदमी पार्टी उसके मुकाबले मजबूत हुई है। ओपिनियन सर्वे में आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं। हालांकि पंजाब में इस बार किसी भी दल को पूर्ण बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल के बीच छींटाकशी में आप आदमी पार्टी का ग्राफ बढ़ा है। एबीपी-सी वोटर के सर्वे में 36 फीसदी वोट आप को मिलते दिख रहे हैं जबकि कांग्रेस को 35 फीसदी वोट। अकाली दल को 21 फीसदी वोट और बीजेपी को महज 2 फीसदी वोट मिलते नजर आ रहे हैं।अमरिंदर सिंह के कांग्रेस छोड़ने से पार्टी को राज्य में बड़ा झटका लगा है। 52 फीसदी लोग मानते हैं कि 
अमरिंदर सिंह के जाने से कांग्रेस को नुकसान होगा जबकि 48 फीसदी मानते हैं कि नुकसान नहीं होगा। इसके अलावा 65 फीसदी लोगों को लगता है कि अमरिंदर सिंह को साथ लाना बीजेपी के लिए फायदा का सौदा नहीं है जबकि 35 फीसदी को लगता है कि अमरिंदर बीजेपी के लिए फायदेमंद होंगे। सच्चाई चुनाव के बाद पता चलेगी। (हिफी)
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