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निरो सो रहा है

निरो सो रहा है

छोटा भाई
हर समय लडता था
हर जगह वो
बात-बात में अडता था
अगल बगल वाले
उसे देते रहते थे शह पर शह
कि अपना हिस्सा मांग
और फिर उससे तु अलग रह
और वह
समय-समय पर ठान लेता जिद
कि विश्व समुदाय के सामने
होता रहे उसकि बस मिट्टी पलीद
अंततः थक हार
मिटाने को तकरार
देकर उसका हिस्सा
किया खुद से किनार
साथ हीं समझाया
जो भी बात हो हमसे कहना
बस उसकि गोद में मत रहना
पर वो नालायक
हमेशा नाचते रहा उसके इशारे पर
और पैदा करता रहा इधर
वो बस डर पर डर
सब दिन करता रहा माफ
ये समझकर कि
वो एक दिन समझ जायेगा
जब कभी उससे धोखा खायेगा
पर होता रहा उलटा
रोज-रोज करता था जलील
देकर सबको-उलटी सीधी दलील
देखते देखते हीं
इधर गरम हुआ उसका पारा
उसे घेरकर खुब मारा
उसे पिटाते देख
निकालने लगा सब मीन-मेख
कहते हुए की ये है अन्याय
इस छोटी जान पर हाय!हाय
मार खाकर वह हो रहा बेहाल
और इधर सब दुश्मन दे रहा ताल
वो अपनी करनी पर रो रहा है
लगाकर आग अपनें ही हाथों
निरो सो रहा है
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वलिदाद, अरवल(बिहार)८०४४०२.
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