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चंदामामा

चंदामामा

चंदामामा शाम ढले जब, तू मेरी छत पर आता है,
रूप बदलना तेरा नित दिन, मेरे मन को भरमाता है।
कभी तू बच्चा, कभी बडा बन, खेल खेलता रातों में,
कभी निकलता पूर्ण रात में और एक दिन छिप जाता है।
तारों के संग आँख मिचौली, बादल के पीछे छिप जाना,
तम हरने का तेरा साहस, मुझमें भी हिम्मत भर जाता है।

अ कीर्तिवर्धन
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