Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

हर घर में तमासा हे

हर घर में तमासा हे


गाँमें गाँमें  मातम
सब खार में चिपरी हे
दाने दाने माजुम। 

ऊ बोल के  मतलब का
जे में न  दही चन्नन
बरसात इया जाड़ा
हे जेठ निअन मौसम। 

जखनी जखनी  पछेआ
माथे में समा जाहे
आँधी पानी ले ले
बिछ जाहे कने सावन। 

मंतर के करेजा मे
जे पीर भरल उमड़े
लतरा के भरम अइसन
पसरे खदबद आँगन। 

कुछ बात हे जिनगी के
उसका -उसका बरजे
दिन रात गिने  अँगुरी
मिलतइ पीअर आसत।
रामकृष्ण
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ