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देशवासियों को जगाऊंगा

देशवासियों को जगाऊंगा

प्यार की डोर लेकर 
मंजिल को तलाश रहा हूँ। 
गीत मिलन के लिखकर
गाये जा रहा हूँ।
पैगाम अमन चैन का
गीतों में दिये जा रहा हूँ। 
और भारतीय होने का
फर्ज निभा रहा हूँ।। 

दोष मुझ में लाख है पर
इंसानियत को जिंदा रखता हूँ। 
है अगर कोई मुश्किल में तो
यथा सम्भव मदद करता हूँ। 
मिला है मनुष्य जन्म हमें
पूर्व जन्मों के कर्मो से। 
इसलिए इस भव में भी
अच्छे कर्म कर रहा हूँ।। 

छोड़कर मान कषाय को 
शांत भाव से जीता हूँ। 
और मानव धर्म का निर्वाह 
सदा ही मैं करता हूँ। 
फिर भले ही चाहे मुझे
मान सम्मान न मिले। 
पर मानवता को ऊपर रखकर
देशवासियों को जगाता रहता हूँ।। 

जय जिनेंद्र 
संजय जैन "बीना" मुंबई
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