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डाकिया भी कोई पत्र लाया नहीं

डाकिया भी कोई पत्र लाया नहीं

बहुत दिन  हुए हैं  मुस्कुराया नहीं
स्वप्न में भी मेरा  मीत  आया नहीं 

मन भटकता रहा उलझनों में,इधर
प्यार का गीत कोई भी गाया नहीं 

तुम गये छोड़कर दिल मेरा तोड़कर
एक पल को  तुम्हें तो  भुलाया नहीं 

मन मेरा आज-कल बहुत बेचैन है
सच कहूं तो कभी चैन  पाया नहीं 

कोई संदेश आया  नहीं  फोन पर,
डाकिया भी  कोई पत्र  लाया नहीं 

तप रही   धूप में   जिंदगी है, कभी
नेह के  पेड़ की   पाया छाया  नहीं 

अनवरत ऑख से  दर्द  झरता रहा  
जय किसी ने भी मरहम लगाया नहीं
                     *
~जयराम 'जय' 
'पर्णिका'बी-11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,
कल्याणपुर,कानपुर-208017(उ०प्र०)
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