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अष्टांग मार्ग के प्रणेता है भगवान बुद्ध

अष्टांग मार्ग के प्रणेता है भगवान बुद्ध 

जहानबाद ।  बुद्ध जयंती के अवसर पर भारतीय विरासत संगठन जहानाबाद  की ओर से आयोजित  मानवीय जीवन की शांति और अहिंसा की भूमिका विचार संगोष्टी में  भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश मानवीय जीवन में शांति और अहिंसा का समावेश आवश्यक है । बौद्ध धर्म के संस्थापक ज्योतिपुंज गौतम बुद्ध का जन्म वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 563 ई. पू. में नेपाल का कपिलवस्तु के लुम्बनी में शाक्य गण के राजा सुद्धोदहं की भर्या माया देवी के पुत्र हुए , बिहार के राजगीर के रुद्रकरामपुत में शिक्षा , बोधगया में स्थित निरंजना नदी के किनारे अवस्थित पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्ति , एवं 80 वर्ष की अवस्था में वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 483 ई.पू.  उत्तरप्रदेश देवरिया के समीप कुशीनारा में महापरिनिर्वाण प्राप्त किए थे । भगवान बुद्ध के अष्टांग मार्ग अपना कर माध्यम मार्ग पर चने से मानव का चसतुर्दिक विकास करता है । भगवान बुद्ध के 2585 वीं बुद्ध जयंती पर भगवसन बुद्ध के बताए रास्ते पर चलने के लिए मानवीय मूल्यों का अनुपालन करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। बुद्धम शरणम गच्छामि अपना कर इंसान का चतुर्दिक विकास होगा ।
 भगवान बुद्ध की अष्टांग मार्ग पर अप्पू आर्ट्स के निदेशक अजय कुमार विश्वकर्मा , मगही विकास मंच जहानाबाद के सचिव अरविंद कुमार आजान्स , जिला कांग्रेस कमिटि जहानाबाद के महासचिव आविद मजीद इराकी , संगठन के जिलाध्यक्ष चितरंजन चैनपुरा  , अशोक कुमार प्रियदर्शी आदि ने विचार व्यक्त किए ।
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