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रूस यूक्रेन युद्ध में पोप का हस्तक्षेप कूटनीति। स्वामी बाल योगी

रूस यूक्रेन युद्ध में पोप का हस्तक्षेप कूटनीति। स्वामी बाल योगी

भारतीय मीडिया में प्रमुख खबरों में पिछले चार-पांच दिनों में यह संज्ञान में आया की पोप रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे इस विषय पर भारत रूस मैत्री संघ के महासचिव श्री राजवीर राठौर ने बताया कि चंद्रास्वामी के सहयोगी आचार्य श्री बालयोगेश्वर जी संस्थापक अध्यक्ष विश्व धर्मागम सेवाश्रम ट्रस्ट निरंजनी अखाड़ा ने प्रेस वार्ता का आयोजन किया है । स्वामी बाल योगी जी ने कहा की रूस यूक्रेन युद्ध के मामले में पोप द्वारा पुतिन से मुलाकात करने की खबरें सामने आई है। भारत के साधु-संतों ने भी इस विषय को गंभीरता पूर्वक लिया है और रूसी दूतावास में मुलाकात करके अपना संदेश रूस के राष्ट्रपति महामहिम पुतिन जी को देने की योजना बनाई है । विश्व की महाशक्तियों के टकराने से विश्व में अनेक समस्याएं पैदा हो गई है। भारत की जनता भी इसकी मार झेल रही है । पोप के द्वारा जो रूस और यूक्रेन के युद्ध में कदम उठाया गया है यह धर्म संगत है या नहीं इस बात पर आगे का परिणाम निर्धारित होगा। ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों की कमी होने के कारण रूस , अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन की जनता अकारण ही कष्ट झेल रही है। ऐसे समय में धर्म संगत न्याय संगत बात करने वाले ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के द्वारा ही कुछ अच्छे परिणाम हासिल हो सकते हैं। अन्यथा संकट और भी बढ़ सकता है और महाशक्तियों के टकराव से कई देश पूरी तरह राख हो सकते हैं। कई देशों का इतिहास से हमेशा के लिए नामोनिशान मिट सकता है क्योंकि इनके अहंकार और घृणित कर्मों से पूरी दुनिया त्रस्त हो गई है। इनके पाप का घड़ा भर चुका है। पाप और अहंकार के वश होकर कुछ महाशक्तियां कुछ राष्ट्र अपनी स्वार्थी गंदी नीतियों से पीछे हटना नहीं चाहते । धर्म और अधर्म का निर्णय नहीं करना चाहते । कुछ महाशक्तियां कुछ राष्ट्र जिन्हें न राष्ट्र की परिभाषा मालूम है न कूटनीति की सीमाएं मर्यादाएं मालूम है ऐसे मानसिक रोगी पूरी दुनिया को नर्क बनाने पर तुले हुए हैं। इनकी विस्तार वादी नीतियां और इनके पाप पोप से छिपे हुए नहीं है और इनके प्रति उदासीनता अधर्म है। पोप जैसे पंथ गुरु धर्म ज्ञान की बात करने वाले जो भारतीय मीडिया में धर्म ज्ञान के लिए छाए हुए हैं। जिस क्रिस्चन पंथ गुरु पोप से गले मिलने के लिए भारत के प्रधानमंत्री मोदीजी आतुर रहते हैं। ऐसे पोप के द्वारा इन अधर्मी राष्ट्रों के प्रति उदासीनता और उनको गुप्त योजनाबद्ध तरीके से प्रोत्साहन इनके विनाश का कारण स्वयं पोप ही होगा। ऐसे राष्ट्रों का जब विनाश होगा तभी विश्व में शान्ति की स्थापना होगी और विश्व की जनता सुखी हो सकेगी। ऐसे पापाचारी राष्ट्रों का शीघ्र से शीघ्र समाप्त होना पूरी तरह नष्ट होना इस विश्व के लिए महाकल्याणकारी है। रूस ने इस युध्द में अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 70 दिन से अधिक युद्ध को संयमित रूप से जारी रखा है। जबकि यूक्रेन को अमेरिका इंग्लैंड आधुनिकतम घातक हथियार दे रहे है। रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अन्याय किया है मनमानी की सीमाएं पार कर रहे हैं। एक महाशक्ति का अपमान हैं। तब श्रीमान पोप जी कहाँ गए थे? अब अमेरिका और ब्रिटेन जो कि पोप की ही सेनाएं हैं जिनके अमानवीय स्वार्थी विस्तारवादी अधिकार जो संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवीय अधिकार कहलाते हैं वे कार्यवाही कर रहे हैं। रूस उनका प्रतिउत्तर दे रहा है। भारत मे गूगल इंटरनेट द्वारा आम जनता को मैसेज भेजे जा रहे हैं यूक्रेन के विरुद्ध कोई टिप्पणी नही करना है। अन्यथा कार्यवाही होगी। परंतु भारत में शक्ति के साथ ज्ञान की पूजा होती है यहां की जनता अनेक कष्टों के बाद भी धर्म संगत न्याय संगत बात करने के लिए प्रयासरत होती है। विजय धर्म की ही होगी।स्वामि बालयोगी जी ने बताया स्वामी विवेकानंद, आचार्य श्री राम शर्मा, रमण महर्षि, संत आशारामजी बापू , स्वामी नित्यानन्द जैसे भारत के संतों ने विश्व में शांति स्थापित करने और युवा पीढ़ी को बचाने के लिए पूरा जीवन सेवा में समर्पित कर दिया है।
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