क्यों करता ये...
न मैं मैं हूँ और न तू तू है
बस शरीर में एक रूह है।
जो उसके द्वारा भेजी हुई
एक अजेय आत्मा है।
और उसी के हाथो की
वो कठ पुतली है।
जो उसके इशारो पर
चलकर शरीर बदलती है।।
मत कर अपने रूप
और शरीर पर अभिमान।
जो एक दिन मिट्टी में
तेरा मिल जाना है।
इसलिए हे मानव तू
आत्मा कल्याण की सोच।
जिसके कारण ही तुझे
अगले भव को पाना है।।
दिया सभी को उसने
जीवन जीने का मौका।
अब निर्भर करता है
की तू कैसे जीयेगा।
भेजा उसने सब को
शून्य ज्ञान देकर।
कितना क्या अब तू
पृथ्वी पर अर्जित करेगा।।
नहीं बनाया उसने
कोई जात पात को।
और नहीं बनाया उसने
ऊँचा नीचे का भेद।
ये सब तो हे मानव
तेरे दिमाग की उपज है।
जो अपने ज्ञान से तूने
ये सब कुछ रचा है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबईहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews
https://www.facebook.com/divyarashmimag
0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com