राष्ट्रपति की यात्रा के वैचारिक पड़ाव
(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की उत्तर प्रदेश यात्रा वैचारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। इस दौरान राष्ट्रपति ने आजादी के अमृत महोत्सव, ग्राम सुराज, संविधान, एक जिला एक उत्पाद, अध्यात्म, संस्कृति सगुण और निर्गुण साधना आदि से सम्बन्धित विचार व्यक्त किए। वह कानपुर देहात कानपुर नगर गोरखपुर संत कबीर नगर काशी और लखनऊ की यात्रा पर आए थे। इस दौरान वह विविध प्रकार के कार्यक्रमों में सहभागी हुए। उनके अनुरूप ही उन्होंने उल्लेखनीय विचार व्यक्त किए। लखनऊ में उन्होंने विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया। इसमें उन्होंने संविधान के अनुरूप कार्य करने का संदेश दिया। काशी और मगहर के संदेश अलग थे। कानपुर देहात में ग्राम स्वराज की चर्चा हुई। कानपुर नगर में उद्योगों को प्रोत्साहन पर विचार किया गया। गोरखपुर में एक जनपद एक उत्पाद की गूंज सुनाई दी। यह योजना अब केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रही है। राष्ट्रपति की काशी और मगहर यात्रा का अलग वैचारिक संदेश था। भारतीय दर्शन में सगुण निर्गुण ज्ञान मार्ग भक्ति मार्ग सभी का महत्त्व प्रतिपादित किया गया। परमसत्ता तक पहुँचने के अनेक मार्ग है। सभी की महिमा है। भारतीय चिंतन में उपासना का सीमित विचार नहीं है। गोस्वामी जी लिखते हैं-
सगुनहिं अगुनहिं नहिं कछु भेदा,
गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा,
अगुन अरूप अलख अज जोई,
भगत प्रेम बस सगुण सो होई।
काशी दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी है। आदिकाल से यह सगुण उपासना का अद्भुत स्थल रहा है। मध्यकाल में मगहर की चर्चा हुई। कहावत थी कि काशी मोक्ष दायनी है। लेकिन मगहर में शरीर त्याग करने से नर्क मिलता है। कबीर दास रुढियों को तोड़ते है। वह भी भारत में सम्मानित हुए। अंतिम समय में वह मगहर चले गए थे। उनका यह निर्णय भारतीय चिंतन के कर्म योग के अनुरूप था जिसमें कर्मों को ही महत्व दिया गया। गीता में भगवान कृष्ण अनासक्त कर्म का संदेश देते है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद मगहर और काशी की यात्रा पर पहुँचे। इस प्रकरण से एक साथ उन्होंने भारतीय दर्शन के दो विचारों पर अमल किया। मगहर में उन्होंने कबीर दास को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। काशी में भगवान भोलेनाथ की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। रामनाथ कोविंद ने कहा कि संतों के आगमन से धरती पवित्र हो जाती है। इसका प्रमाण मगहर की धरती है। यहां लगभग तीन वर्ष तक संत कबीर दास रहे। यहां पर जल का अभाव था लेकिन संत कबीर दास के निवेदन पर गोरक्षपीठ के एक संत यहां आए और उनके प्रभाव से यहां का तालाब जल से भर गया और गोरख तलैया से सूखी पड़ी आमी नदी को जीवंत कर दिया। मानव जीवन को सुधारने के लिए कबीरदास मगहर आए थे। वह सच्चे भक्त थे। लोगों की पीड़ा को समझते थे।उसे दूर करने के उपाय भी करते थे। संत कबीर ने समाज को समानता और समरसता का मार्ग दिखाया तथा कुरीतियों, आडंबरों और भेदभाव को दूर करने के लिए प्रेरित किया। मगहर में राम नाथ कोविन्द द्वारा शिक्षा, संस्कृति एवं पर्यटन से जुड़ी 86.76 करोड़ लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अलग अलग स्थानों पर रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट व बौद्ध सर्किट जैसी अनेक परियोजनाएं संचालित हैं। जो पर्यटन विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के साथ ही नौजवानों के लिए रोजगार की सुविधा भी उपलब्ध करा रही हैं। इसके पहले योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में रामनाथ कोविंद और आनंदी बेन पटेल को टेराकोटा शिल्प से बनीं भगवान श्री गणेश की मूर्तियां भेंट कीं। सर्किट हाउस में राष्ट्रपति के सपरिवार अवलोकन के लिए टेराकोटा शिल्प का स्टाल लगाया गया। टेराकोटा गोरखपुर की खास व पारंपरिक पहचान है। मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे ओडीओपी में शामिल कर योगी आदित्यनाथ ने इसे उद्यमिता और रोजगार का बड़ा फलक प्रदान किया है। योगी सरकार के प्रयासों से यह अब ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित हो रहा है। कहा जाता है कि इतिहास अपने को किसी न किसी रूप में दोहराता है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की गोरखपुर यात्रा में यह दिलचस्प रूप में दिखाई दिया। राष्ट्रपति गीता प्रेस के शताब्दी समारोह में सहभागी होने गोरखपुर आए थे। 1955 में गीता प्रेस के मुख्य द्वार एवं चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद यहां पर आए थे। तब उनके साथ तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महन्त दिग्विजयनाथ भी थे। इसके शताब्दी वर्ष के इस समारोह का शुभारम्भ वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने किया। इस अवसर पर वर्तमान गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे। रामनाथ कोविद ने कहा कि प्राचीन भारतीय शासकों ने प्रायः अपने शासन में धर्म का अनुपालन किया है। धर्म और शासन एक-दूसरे के पूरक हैं। आज वही दृश्य यहां देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरक्षपीठाधीश्वर के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं। एक व्यक्ति में दोनों चीजें समाहित होना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। गीता प्रेस से हिन्दू परिवारों का सहज स्वाभाविक लगाव रहा है। घर के पूजा घरों में गीता प्रेस से प्रकाशित ग्रंथ सुशोभित रहते है। लगभग लागत के मूल्य पर यहां का प्रकाशित साहित्य उपलब्ध रहता था। गीता, राम रचित मानस आदि अमूल्य साहित्य भी निर्धनता परिवारों की पहुँच में रहता था। यहां से प्रकाशित कल्याण पत्रिका भी बहुत लोकप्रिय हुआ करती थी। इसमें प्रकाशित देवी देवताओं के चित्र बहुत दर्शनीय होते थे ।इस कारण घर के छोटे बच्चे भी इस पत्रिका को रुचि के साथ देखते थे। सरल भाषा शैली में पाठकों को धार्मिक कथा प्रसंगों की जानकारी मिलती थी। अध्यात्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती थी। राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने कहा भी कि गीता प्रेस को भारत के घर-घर में रामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता को पहुंचाने का श्रेय जाता है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले लोग कल्याण पत्रिका को प्राप्त करने के लिए महीने भर प्रतीक्षा करते थे। अब तकनीक के माध्यम से यह पत्रिका सर्वसुलभ है। गीता प्रेस एक प्रेस नहीं, साहित्य का मंदिर है। सनातन धर्म को बचाए रखने में जितना योगदान मंदिरों का है, उतना ही योगदान गीता प्रेस के द्वारा प्रकाशित साहित्य का भी है। भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान के प्रसार में गीता प्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। रामनाथ कोविद अपने गांव भी पहुँचे थे। देश के राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री एक साथ यहां मौजूद थे। डॉ आंबेडकर और महात्मा गांधी का स्मरण किया गया। दोनों के विचारों पर अमल का संकल्प व्यक्त किया गया। संविधान की भावना के अनुरूप प्रजातंत्र को मजबूत बनाने पर विचार हुआ। परौंख में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने एक साथ आकर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार किया है। रामनाथ कोविंद नरेन्द्र मोदी आनन्दी बेन पटेल और योगी आदित्यनाथ कानपुर देहात के ग्राम परौंख में आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में मेरा गांव मेरी धरोहर अभियान के अन्तर्गत आयोजित समारोह में सम्मिलित हुए थे। कानपुर में उन्होंने कहा कि देश ही नहीं विदेश में भी कानपुर का उद्यम जाना जाता है। वह मर्चेंट चैंबर में उद्योगपतियों के कार्यक्रम में सहभागी हुए। कानपुर के उद्यम को बढ़ावा देने के साथ ही उद्यमियों को एक मंच पर लाने के लिए नब्बे वर्ष पूर्व मर्चेंट ऑफ चैंबर उत्तर प्रदेश की स्थापना हुई थी। मर्चेंट चैंबर शहर के उद्यमियों और व्यापारियों का सबसे बड़ा संगठन है। नब्बे वर्ष पूरे होने पर शनिवार को राष्ट्रपति उद्यमियों के विशेष आग्रह पर उनके कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि कानपुर का उद्यम देश में ही नहीं विदेश में भी जाना जाता है। कानपुर के व्यापारियों की कड़ी मेहनत ने ही कानपुर को अग्रणी शहरों में बनाया है। कानपुर के उद्यम के विकास के लिए जो यह संगठन मर्चेंट चेंबर है देश की आजादी के पहले से ही कार्यरत है।
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