*हिंसक, आतंकी सोचो तो*
तुम मानवता का खून बहा मानव के बीच रहोगे,
सोचा है दुष्परिणाम कभी, क्या एकाकी सब सह लोगे।।
अनुचित- उचित विचार न करके, अपनी शक्ति पहिचान न करके,
स्वयं ही विकृत निर्णय लेकर, क्या विपरीत लहर में बहोगे।।
अहंकार की तेज क्षुधा भले भटका दे तेरे मन को,
पर ताप-बर्षा-हिम के दु:ख क्या मन से सहन करोगे।।
अपने भटके निर्णय से ही जब था भविष्य अपना गढ़ना
तब "विवेक" से बोलो कैसे मानव बनकर तुम रह लोगे।।
डॉक्टर विवेकानंद मिश्र, डॉक्टर विवेकानंद पथ गोल बगीचा गया बिहार
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