वर्ण और संस्कार
जय प्रकाश कुँवरबहुत समय पहले की बात है। तब किसी जगह एक प्रतापी राजा राज करते थे । वे बहुत ही उच्च कुलीन, न्यायप्रिय और धर्मात्मा राजा थे । उनको काफी समय तक कोई संतान नहीं थी। उन दिनों समाज में जाति - पाति,वर्ण, धर्म आदि का खुब बोल बाला था। फिर भी उनके राज में प्रजा काफी सुखी थी और राजा अपने व्यवहार और न्यायप्रियता से सबको खुश रखते थे। ज्यादातर उनके राज काज का काम उनके मंत्री ही देखते थे और राजा उन पर बहुत विश्वास करते थे और उनसे सलाह मशविरा करके ही राज का काम देखते थे।
लगभग आधी उम्र बीत जाने के बाद ईश्वर की मन्नत और उनके कृपा से राजा की रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया। लड़का थोड़े श्याम वर्ण का पैदा हुआ, जिसे देख कर रानी को खुशी कम और दुख ज्यादा हुआ। उनका प्रसव कराने वाली दाई ने उन्हें बताया कि ठीक उसी दिन उनके ही राज में एक अन्य गरीब महिला ने एक गौर वर्ण के बच्चे को जन्म दिया है और उसने ही उसके यहां भी प्रसव कराया है। दाई ने रानी को बताया कि वह गरीब महिला प्रसव के बाद अभी भी बेहोश है और उसने अभी अपने बच्चे को देखा तक नहीं है। अब अगर रानी जी चाहें और मुझे पुरस्कृत करें तो वह बच्चों की अदला बदली कर सकती हैं। यह सुनकर रानी का चेहरा खिल उठा और उनकी सहमति लेकर दाई ने बच्चों का अदला बदली कर दिया और रानी जी से खुब इनाम पायी। रानी के पास अब उस गरीब महिला का गोरा बच्चा था और उस महिला के पास रानी का श्याम वर्ण का बच्चा था।
वह गरीब महिला एक गोंड जाति की थी, जिसका पेशा भांड़ चलाना था,यानि गर्म बालू से अन्न भुंजना और सत्तू भुंजा तैयार करना था। प्रसव के बाद जब उस महिला को होश आया तो उसने अपने नवजात श्याम वर्ण के बच्चे को देखा और काफी खुश हुयी।यह भेद केवल दोनों तरफ प्रसव कराने वाली दाई और रानी के बीच ही छुपा रहा। यहां तक कि राजा भी यह भेद नहीं जानने पाये और अपने नवजात गौर वर्ण के बच्चे को देखकर बहुत खुश हुए। राजकुमार के जन्म पर राज में खुब हर्षोल्लास हुआ।
धीरे धीरे समय बिताता गया और बच्चे कुछ बड़े हुए। अब जब सभी बच्चे साथ खेलते होते तो वह श्याम वर्ण का गोंड का बच्चा अपने फटे पुराने कपड़े में खुद कुर्सी पर बैठ जाता और राजा के बच्चे के साथ ही सभी अन्य बच्चों को नीचे बैठने का आदेश देता। एक दिन गोंड के श्याम वर्ण के बच्चे ने राजा के गौर वर्ण के बच्चे को,जो उस समय अच्छे वस्त्र पहने हुए थे,उनको घोड़ा बनाकर उनके पीठ पर बैठ कर सवारी करने लगा। उसके इस हरकत को देख कर राजा के मंत्री से न रहा गया, क्योंकि वह सभी बच्चों की खेल खेल में ही होती हरकत पर रोज नजर रखता था। अब वह इन हरकतों को देख कर उस श्याम वर्ण के बच्चे को शक की नजर से देखने लगा। फिर भी अपना मुंह बंद ही रखना अभी उचित समझा। कुछ और समय बीतने पर राजकुमार सहित वे सभी बच्चे बड़े होकर नवयुवक बन गये। राजा अब राजकुमार को अपने राज काज की कुछ गतिविधियों में शामिल करने लगे। अब कुछ न्यायिक फ़ैसलों में भी उनकी मंत्रणा ली जाने लगी।
एक समय राजदरबार में चोरी के एक अभियुक्त को पकड़ कर न्याय और दंड के लिए लाया गया। आमजन के अलावे दरबार में सभी दरबारी, मंत्री, राजकुमार और राजा उपस्थित थे। राजा ने उस चोर की फरियाद के अलावा दरबारियों और मंत्री की बात गौर से सुनने के बाद यह निर्णय लिया कि आज के इस मुकदमे का न्याय राजकुमार करेंगे। राजकुमार भी सभी पक्षों को सुनने के बाद उस चोर को चोरी का दोषी ठहराया। और सजा के रूप में यह निर्णय दिया कि इस चोर के शरीर पर गर्म तपता हुआ बालू तब तक डलवाया जाय,जब तक इसकी मृत्यु नहीं हो जाती। राजकुमार द्वारा घोषित इस सजा को सुनकर राजा के मंत्री से न रहा गया और वे जोर से " जाति रे जाति " कह कर चिल्ला उठे। राजा अपने मंत्री की बात और चिल्लाहट सुनकर खुद भी चौंक पड़े और पुरे दरबार में सन्नाटा छा गया।
अब जब सन्नाटे के बाद राजा ने इसका मतलब अपने मंत्री से जानना चाहा तो मंत्री ने खुद को क्षमा प्रदान करने की शर्त पर राजा से कहा कि मुझे इस बच्चे पर यह शक हो रहा है। यह बच्चा आपका नहीं है। इस बच्चे में बचपन से ही मैंने इस राजपरिवार का कोई भी संस्कार नहीं देखा है,जब यह अन्य बच्चों के साथ खेलता कुदता था। और आज के इस सजा के ऐलान से तो मैं दंग रह गया और मुझे पूर्ण विश्वास हो गया कि जरूर कोई रहस्य है इस बच्चे में। अब आप कृपा करके अपनी रानी साहिबा से इस बच्चे के जन्म की पुरी जानकारी प्राप्त करें। राजा अब जब कठोरता से पेश आकर रानी से सच्चाई जानने की कोशिश की तो सब पिछली बातें सामने आ गयीं। उस दाई को भी राजदरबार में बुलाया गया, जिसने बच्चों की अदला बदली की थी। उस गोंड परिवार को भी बच्चे सहित राजदरबार में बुलाया गया और उन लोगों ने भी उस दाई की उस गलत हरकत की कहानी अन्य दरबारियों के साथ सुनी।पुरी सच्चाई को जानने के बाद राजा को काफी दुख हुआ। हिलांकि दोनों परिवारों को अपने अपने बच्चे मिल गये परन्तु राजा ने उन दोनों श्याम वर्ण और गौर वर्ण के बच्चों को, उस गोंड परिवार से सहमति लेकर अपने राजपरिवार में ही रखना उचित समझा, ताकि दोनों की ठीक से परिवरिश तथा शिक्षा आदि हो सके और दोनों को समान अधिकार प्राप्त हो सके।
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