कैसा रहेगा शनि का राशि परिवर्तन सभी राशि वालों के लिए?
लेखक: रवि शेखर सिन्हा उर्फ आचार्य मनमोहन ।
ज्योतिष मार्तंड एवं जन्म कुंडली विशेषज्ञ।
मैं आप सबको और आप सबके हृदय में विराजमान ईश्वर को प्रणाम करता हूं और धन्यवाद करता हूं।
पिछले अंक जून 2022 के अंक में हमने चर्चा की थी देव गुरु बृहस्पति के राशि परिवर्तन की और इस अंक में जुलाई 2022 के अंक में हम चर्चा करेंगे न्यायाधीश, दंडाधिकारी शनिदेव के राशि परिवर्तन की। जब भी शनि देव की राशि परिवर्तन की बात होती है अथवा उनके मार्गी, वक्री होने के बात होती है तो बात बहुत विशेष हो जाती है। बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर शनिदेव का विशेष प्रभाव पड़ता है। प्रायः पूरे वर्ष 12 में से 9 राशियां शनिदेव के प्रभाव में रहती हैं। शनिदेव से जनमानस भयभीत रहता है ।
आज हम विस्तार से बात करेंगे शनिदेव की राशि परिवर्तन की। वर्तमान समय में धनु राशि, मकर राशि, कुंभ राशि की साढ़ेसाती चल रही है। तुला राशि और मिथुन राशि की ढैया चल रही है। 29 अप्रैल 2022 को शनि देव अपनी साधारण मकर राशि को छोड़कर अपने मूल त्रिकोण राशि कुंभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं। 12 जुलाई 2022 तक शनि देव इस राशि पर मार्गी होकर रहेंगे। फिर 12 जुलाई 2022 से वक्री होकर वापस मकर राशि पर लौट आएंगे और 17 जनवरी 2023 तक वक्री होकर मकर राशि में ही विराजमान होंगे। 17 जनवरी 2023 को मार्गी होकर पुन: अपने मूल त्रिकोण राशि कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि का इस प्रकार का मकर से कुंभ, कुंभ से मकर वापस फिर मकर से कुंभ राशि में आना जाना पूरे विश्व को बेहद प्रभावित करने वाला होगा। सभी राशि वालों के जीवन में कई प्रकार की घटनाएं घटित होंगी ।
शनिदेव न्यायाधीश हैं, दंडाधिकारी हैं, कर्म फल दाता हैं। अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार शीघ्र फलदायक होंगे। यह राशिफल लग्न और राशि दोनों के आधार पर देखना चाहिए। फलदीपिका के अनुसार गोचर के ग्रहों का फल लग्न और राशि दोनों से ही देखना चाहिए और दोनों में अर्थात लग्न और राशि दोनों में यदि इसके शुभ परिणाम बताए जा रहे हैं तो आप निश्चिंत रहें आपको अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होगी। किंतु यदि एक में शुभ फल और दूसरे में अशुभ फल बताए गए हैं तो फिर मिलाजुला फल मिलेगा और यदि लग्न और राशि दोनों में ही अशुभ फल बताए गए हैं तो आपको बेहद सतर्क सावधान रहने की आवश्यकता होगी। क्योंकि इसके बड़े दुष्परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। ध्यान रहे शनि के गोचर का प्रभाव मूल रूप से जन्म कुंडली पर आधारित होता है। यदि आप की जन्म कुंडली में शनि देव वक्री हो, शुभ स्थान में बैठे हो, शुभ ग्रहों के प्रभाव में हों और चंद्रमा से शनि का कोई संबंध नहीं बन रहा है तो बताए गए शुभ परिणाम शत-प्रतिशत आपको प्राप्त होंगे। किंतु यदि आपकी जन्म कुंडली में शनि नीच राशि में, मार्गी होकर, पाप ग्रहों के प्रभाव में अथवा चंद्रमा से सीधा सीधा संबंध बना रहे हैं, चंद्रमा के साथ युति बना रहे हो और आपकी जन्मकुंडली में कोई मारक ग्रह की महादशा चल रही हो, अष्टमेश की महादशा चल रही हो, राहु की महादशा चल रही हो, सूर्य , मंगल ग्रह की महादशा चल रही हो, शनि की महादशा चल रही हो तब आप बेहद सतर्क सावधान हो जाएं जाएं।यह गोचर प्राणघातक भी हो सकता है।
कर्क राशि और वृश्चिक राशि वालों की ढैया आरंभ हो जाएगी और मीन राशि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। एक उदाहरण के तौर पर समझें अगर किसी की मीन राशि और कर्क लग्न है तो 17 जनवरी 2023 से कर्क राशि पर शनि की ढैया और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होगा। अतः ऐसे में इस प्रकार की राशि और लग्न वालों को बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है। यदि कहीं इसमें शनि की महादशा भी आरंभ हो जाए तो यह समय बेहद खतरनाक सिद्ध होगा।
शनि का इस प्रकार मकर से कुंभ, कुंभ से मकर वापस फिर मकर से कुंभ राशि में आना जाना पूरे विश्व को बेहद प्रभावित करने वाला होगा। सभी राशि वालों के जीवन में कई प्रकार की घटनाएं घटित होंगी ।
मेष राशि: मेष लग्न और मेष राशि से शनि का यह गोचर लाभ भाव में हो रहा है। शनि दशम घर और एकादश घर के स्वामी होते हैं। अतः अब प्रत्येक कार्य में विलंब होगा। कोई भी कार्य आसानी से नहीं हो पाएगा। शनि देव की तीसरी दृष्टि लग्न राशि पर पड़ने के कारण प्रत्येक कार्य में देरी होगी ।
यह आपके व्यक्तित्व को प्रभावित करेंगे। आपके अंदर जिद और क्रोध की मात्रा बढ़ेगी। अपनी बातों को छुपाने की नई आदत बनेगी। आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। आपके स्वभाव में कड़वाहट पैदा हो जाएगा। बात बात पर अपने करीबी लोगों से आपका विवाद होगा, मतभेद होगा। पैतृक संपत्ति को लेकर मन में तनाव पैदा होगा। संतान संबंधी कोई चिंता होगी। संतान की बातों को लेकर परेशानी होगी। यदि आपकी संतान शिक्षा ग्रहण कर रही है तब तो शनिदेव अच्छी उम्मीद लेकर आए हैं और आपके बच्चों की पढ़ाई लिखाई में अच्छा लाभ होगा। लाभ स्थान पर शनि के गोचर के कारण आमदनी में वृद्धि होगी। जमा धन बढ़ेगा। नौकरी में पदोन्नति होगी। मित्रों से अच्छा संबंध होगा। अचानक किसी पुराने मित्र से आपको सहयोग मिलेगा। अष्टम घर पर शनि की दृष्टि के कारण आकस्मिक धन का लाभ भी होगा। किंतु आयु संबंधी कष्ट भी प्राप्त होगा। सतर्क सावधान रहें। लंबे समय तक चलने वाला कोई रोग ना हो जाए इसकी संभावना बनी रहेगी। गुप्त रोगों की भी संभावना बनेगी। किंतु शनि देव इन्हीं रोगों से, बीमारी से आपकी रक्षा भी करेंगे। शनि देव की नीच दृष्टि प्रभाव के कारण आपको गलत कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। गैर कानूनी कार्य करने में रुचि बढ़ेगी। आपको ऐसे लोग भी मिल जाएंगे जो आपको गलत दिशा देंगे, गलत सलाह देंगे और आपको गलत राह पर ले जाएंगे। परिणाम आपको बेहद मानसिक तनाव, अपयश और सामाजिक निंदा से गुजरना पड़ेगा।
पैरों का, जोड़ों का, नसों का रोग आपको परेशान कर सकता है। बात-बात पर बेवजह लोगों से आपका झगड़ा होता रहेगा। रिश्तो में परेशानियां पैदा होंगी। आपके रिश्तेदारों से दूरियां बढ़ेंगी। इस समय गोचर में देव गुरु बृहस्पति पाप कर्तरी योग बना रहे हैं जिसके कारण आप गलत कार्यों में लिप्त होंगे और कई प्रकार की समस्याओं में उलझे रहेंगे। अर्थात आप के जीवन से शुभता समाप्त हो जाएगी।
अपने व्यवहार ,अपने क्रोध, अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना आपके लिए बेहद आवश्यक है।
वृषभ राशि : वृषभ राशि में दशम स्थान में शनिदेव का यह गोचर शश महापुरुष योग बना रहा है। वृष लग्न , राशि में शनि देव प्रबल योगकारक अर्थात बेहद शुभ प्रभाव देने वाले माने जाते हैं। इस राशि, लग्न के कर्म भाव पर शनिदेव का यह गोचर अत्यधिक लाभदायक होगा। यह समय वृष राशि वालों के लिए किसी वरदान की तरह होगा। अच्छी और लंबी यात्राएं होंगी। सुखद यात्राएं होंगी। यात्राओं से लाभ होगा। नौकरी पेशा लोगों के लिए बहुत ही शुभ होगा। घर परिवार में सुख समृद्धि बढ़ेगी। भूमि, भवन, वाहन के सुखों में वृद्धि होगी। अधूरा पड़ा घर मकान पूरा होगा। नए वाहन खरीदने की संभावना है। कोई मशीनरी अथवा इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में आने की संभावना है। धन-संपत्ति अच्छी मात्रा में प्राप्त होगी। किंतु खर्च की अधिकता भी रहेगी और प्रायः यह खर्च घरेलू सुखों में वृद्धि के लिए होगा। कई बार धन के कारण रिश्तो में तनाव भी आएगा। खर्च की अधिकता के कारण धन बचत करने में कमी रहेगी। चतुर्थ स्थान पर शनि की दृष्टि एक तरफ चल अचल संपत्ति में लाभ और वृद्धि दे रही हैं तो दूसरी तरफ माता के स्वास्थ्य में परेशानी भी दे रहा है। साथ ही साथ माता के साथ रिश्तो में तनाव पैदा होगा। दांपत्य जीवन में तनाव और परेशानी की स्थिति रहेगी। पिता के साथ मतभेद होने की संभावना रहेगी। पुराना कोई केस मुकदमा अचानक खुल सकता है। जिसके कारण कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। गोचर में देव गुरु बृहस्पति पाप कर्तरी योग में पड़ जाने के कारण अशुभ प्रभाव देते हुए पेट के रोगों से परेशानी दे सकते हैं। बड़े भाई बहन के साथ मतभेद होगा। संतान के साथ रिश्तो में तनाव पैदा होगा। घर में कलह की स्थिति बनेगी। कोई विवादित चल अचल संपत्ति ना खरीदें। घर में कई तरह की उलझन और परेशानियां रहेंगी। किंतु घर के बाहर सारे कार्य पूरे होते चले जाएंगे। विद्यार्थियों के लिए यह समय अत्यंत शुभ है। पढ़ाई लिखाई, परीक्षा में मनचाही सफलता प्राप्त होगी। व्यापारियों के लिए भी यह समय बहुत ही अच्छा कहा जाएगा। यदि कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं तो अवश्य करें । यह समय अत्यंत शुभ फलदायक रहेगा। किंतु यदि कोई पार्टनरशिप में व्यापार व्यवसाय कर रहे हैं तो सतर्क सावधान रहें। पार्टनरशिप टूटने की संभावना बन रही है। पहले से चला आ रहा यदि कोई वाद विवाद है तो उसमें बढ़ोतरी की संभावना होगी। उससे अपयश, कलंक मिल सकता है। किसी भी तरह के गैर कानूनी कार्य करने से बचें। अन्यथा जेल, जुर्माना या कोई बड़ी समस्या आ सकती है।
मिथुन राशि: मिथुन लग्न, राशि में नवम भाव में, भाग्य के घर में शनिदेव का यह गोचर बहुत ही भाग्य वर्धक और सुखदायक है। शनि देव मिथुन लग्न, राशि वालों के लिए नया बदलाव और नया सवेरा लेकर आ रहे हैं। कार्यक्षेत्र में नया और सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहे हैं। नई नीतियां बनेगी। नई योजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा और इन सभी कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होगी। पिछले लंबे समय से रुका पड़ा काम अब तीव्र गति से चल पड़ेगा। मिथुन लग्न, मिथुन राशि के व्यक्ति जो काफी लंबे समय से अपने सपने को पाल रखा था, जो पूरा नहीं हो पा रहा था, वह सपना अब पूरा होने जा रहा है। भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा।
किंतु छोटे भाई बहनों के साथ रिश्तो में मतभेद की संभावना बनेगी। हालांकि गोचर में देव गुरु बृहस्पति, शनि और राहु के कारण पाप कर्तरी योग में होने के बाद भी दशम स्थान केंद्र में हंस महापुरुष योग बना रहे हैं। राहु गोचर में एकादश भाव में संचरण कर रहे हैं और शनि देव भाग्य के घर में विराजमान है। राहु का एकादशी घर में अति विशिष्ट कारक ग्रह होने के कारण, देव गुरु बृहस्पति हंस महापुरुष योग बनाने के कारण और शनिदेव भाग्य स्थान पर भाग्येश बनकर विराजमान होने के कारण अत्यंत श्रेष्ठ और शुभ फल प्रदान करने वाले होंगे। चारों तरफ से शुभता, सफलता ही सफलता और हर प्रकार से लाभ की संभावना बन रही है।
एकादश घर में राहु छठे घर से छठे स्थान पर और शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़ित होने के कारण चोट चपेट की घटना की संभावना बना रहे हैं। सतर्क रहें। पेट के रोग की संभावना भी बन रही है। पिता के साथ मतभेद की संभावना बन रही है। इन सबके बावजूद स्थिति मिथुन राशि और मिथुन लग्न वालों के पक्ष में ही होगी। सभी प्रकार के विरोध को शांत करके रक्षा करने का कार्य स्वयं शनिदेव करेंगे।
व्यापारियों के लिए यह समय अत्यंत श्रेष्ठ होगा। धन का आगमन लगातार होता रहेगा। सभी कार्य एक-एक करके बनते चले जाएंगे। नौकरी पेशा लोगों के लिए भी यह समय अत्यंत शुभ फलदायक है। किंतु थोड़ी परिश्रम की आवश्यकता होगी।
प्रेम संबंधों में अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। प्रेमी प्रेमिकाओं के लिए भी यह समय शुभ है। विद्यार्थियों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ समय होगा। जीवन साथी के स्वास्थ्य में थोड़ी परेशानी आ सकती है। इस गोचर के शुभ फलों को प्राप्त करने के लिए सभी प्रकार से रक्षा के लिए श्री हनुमान जी के शरण में रहे। हनुमान जी की पूजा आराधना करते रहे। हनुमान चालीसा का पाठ करना, शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करना अत्यंत शुभ फलदायक होगा।
कर्क राशि: कर्क राशि, लग्न वालों के लिए गोचर में अष्टम घर में शनि की स्थिति अधिक शुभ प्रभाव नहीं देने वाली बन रही है। कर्क राशि, कर्क लग्न वालों की ढैया आरंभ हो गई है। लगभग सभी कार्यों में विलंब होने की संभावना है। घर में थोड़ा कलह और मतभेद की स्थिति बनेगी। पारिवारिक संपत्ति को लेकर विवाद बढ़ेगा। कार्यक्षेत्र में बदलाव होगा। संतान को थोड़ा कष्ट होगा। धन आगमन में कमी महसूस होगी। व्यर्थ का खर्च बढ़ा चढ़ा रहेगा। कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। नौकरी में कष्ट होगा। बेवजह तनाव, वाणी में कड़वाहट और रिश्तो में दरार की स्थिति बनेगी। घर में वाद विवाद होगा। शिक्षा में, पढ़ाई लिखाई में बाधा आएगी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी आ सकती हैं। विशेष रूप से पेट के रोगों की संभावना बन रही है। यदि कोई पुराना रोग पहले से चला आ रहा है तो और लंबे समय तक परेशान करने वाला होगा। इस गोचर के दौरान लंबे समय तक चलने वाले रूप की भी संभावना बन रही है। गुप्त रोगों की संभावना भी बन रही है।
हनुमान जी की प्रतिदिन आराधना करते रहें। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे जल अर्पित करें और एक लोहे का छल्ला सीधे हाथ की मध्यमा उंगली में शनिवार की रात को धारण करें।
सिंह राशि: सिंह लग्न,राशि वालों के गोचर में सातवें घर में अपनी स्वयं की राशि में शनि देव का यह गोचर शश महापुरुष योग का निर्माण कर रहा है।
इस योग के कारण व्यापार, व्यवसाय में वृद्धि का संकेत मिल रहा है। यदि आप कोई नया रोजगार या कारोबार आरंभ करना चाहते हैं अत्यंत शुभ समय है। नया रोजगार, नया कारोबार, नया व्यापार आरंभ होगा।
किंतु पार्टनरशिप में अगर कोई रोजगार या व्यापार कर रहे हैं तो उसमें धोखा मिलने की संभावना है । आपका पार्टनर धोखा देने की पूरी कोशिश करेगा। फिर भी अनबन और विवाद के बाद आप धोखे से बच जाएंगे। किंतु पार्टनर के साथ आपका रिश्ता खराब हो जाएगा। आलस्य से बचें। क्योंकि शनि की सातवीं दृष्टि शरीर पर पड़ने के कारण आलस बढ़ेगा। जिसके कारण हर कार्य में विलंब होगा। हर कार्य में देरी होगी। दांपत्य जीवन में उदासीनता पैदा होगी। पति-पत्नी के जीवन में दूरियां पैदा होंगी। विरोधी इस समय हावी रहेंगे। हर कार्य में, हर जगह आपको विरोधियों का सामना करना पड़ेगा। किंतु उच्च अधिकारियों से हमेशा सहयोग मिलता रहेगा। शनि देव की तीसरी दृष्टि पिता स्थान पर पड़ने के कारण यह समय पिता के स्वास्थ्य के लिए शुभ नहीं होगा। अपने पिता के स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखें।
माता पिता के साथ मतभेद, मनभेद भी होने की पूरी संभावना है। आप स्वयं भी अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखें। पेट से संबंधित रोग की स्थिति बन रही है। हो सकता है किसी तरह का कोई ऑपरेशन भी कराना पड़े। धर्म से दूरी पैदा होगी। पूजा-पाठ, धर्म-कर्म में मन नहीं लगेगा। घर में कलह का योग है। हर किसी से वाद विवाद के योग बन रहे हैं। धर्म से जुड़ने का प्रयास करें। निरंतर श्री हनुमानजी की उपासना आराधना करते रहें और शनि के मंत्रों का जाप करते रहे राहत अवश्य मिलेगी।
कन्या राशि: कन्या राशि और कन्या लग्न से छठे घर में अपनी मूल त्रिकोण राशि में शनिदेव का यह गोचर शत्रु हंता योग बना रहा है। यह बहुत ही शानदार योग होता है। जीवन की बहुत सारी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। इस समय यदि कोई आप से विवाद करें, झगड़ा करें तो उसे आप से पराजित होना पड़ेगा। किंतु छठे घर से शनि देव की तीसरी दृष्टि राहु पर पड़ने के कारण चोट चपेट और दुर्घटना की समस्या का भी सामना आपको करना पड़ सकता है। वाहन चलाने में बेहद सावधानी रखें। रास्ते पर चलते समय ध्यान रखें। अन्यथा कोई दुर्घटना होने की संभावना बन रही है। देव गुरु बृहस्पति सातवें घर में, शनि और राहु के प्रभाव से पाप कर्तरी योग में होने के कारण परेशानियां उत्पन्न करेंगे। दांपत्य जीवन में कलह उत्पन्न होगा। पति पत्नी में झगड़े, झंझट, विवाद पैदा होंगे। कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। किंतु शनि देव शत्रु हंता योग बनाते हुए आपकी सभी समस्याओं का समाधान भी करेंगे। रोग और शत्रुओं का नाश करेंगे।
किंतु रिश्तो में परेशानियां बढ़ेंगी। भाई बहनों के साथ रिश्ते खराब होंगे। लेकिन आप का पराक्रम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा।
आपके जीवनसाथी से मतभेद होने की संभावना है। अथवा उनके स्वास्थ्य में कोई परेशानी होने की पूरी संभावना बन रही है। जिसके कारण पारिवारिक दांपत्य जीवन में दूरियां पैदा होंगी। इस समय पार्टनरशिप में कोई भी कार्य करना शुभ नहीं होगा। यदि आप अकेले स्वतंत्र व्यापार या व्यवसाय करें तो उसके अत्यंत शुभ फल प्राप्त होंगे। यात्रा में सावधान रहें । यात्रा में चोरी होने की और दुर्घटना होने की संभावना बन रही है। शनिदेव का यह गोचर विद्यार्थियों के लिए बहुत ही शुभ है। सभी तरह की परीक्षा में सफलता मिलेगी। पढ़ाई लिखाई के लिए शुभ समय है। बस थोड़ा आलस्य से बचें। किंतु सरकारी नौकरी में सेवा कर रहे व्यक्तियों के लिए यह समय शुभ नहीं है। व्यर्थ के विवाद में फंसने का योग है। वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।
शनिदेव के मंत्रों का जाप करते रहें और शनि से संबंधित काली चीजों का दान करते रहें। लाभ होगा। श्री हनुमान जी की आराधना उपासना करते रहे।
तुला राशि: तुला लग्न एवं तुला राशि से पंचम में शनि का यह गोचर मिलाजुला प्रभाव देने वाला होगा। नए नए रिश्ते बनेंगे। नए नए मित्र बनेंगे। उन से लाभ मिलेगा। किंतु पुराने मित्रों से थोड़ा मनमुटाव की स्थिति बनेगी। दूरियां बढ़ सकती हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा नहीं होगा। शिक्षा में बाधा आएगी। पढ़ाई लिखाई रुक रुक कर बाधाओं के साथ चलेगी। घर से दूर जाकर शिक्षा प्राप्त करने के योग बन रहे हैं। दांपत्य जीवन सामान्य रहेगा। प्रेम संबंधों में तनाव की स्थिति बनेगी। फिर भी प्रेम संबंधों में लाभ मिलेगा। बड़े भाई बहनों से मतभेद होने की संभावना बन रही है। कुटुंब परिवार में कलह की स्थिति बन रही है। पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद की संभावना बन रही है।
धन आगमन में परेशानी दिख रही है। किंतु मूल त्रिकोण राशि के शनि के प्रभाव से इन सभी परेशानियों के बाद भी विलंब से ही सही सभी कार्य बनते चले जाएंगे।
श्री हनुमान जी की आराधना उपासना बहुत लाभकारी होगा। शनिदेव का मंत्र का जाप करना, पीपल के वृक्ष में शनिवार की सूर्योदय से पूर्व जलाभिषेक करना अत्यंत शुभ फलदायक होगा। एक लोहे की अंगूठी, घोड़े की नाल की अंगूठी पहनना बहुत ही शुभ फलदायक होगा।
वृश्चिक राशि: वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि के लिए चौथे घर में शनि का यह गोचर शश महापुरुष योग तो बना रहा है किंतु चतुर्थ स्थान में शनि के होने के कारण शनि की ढैया आरंभ हो जाएगी। चौथे घर में शनि का प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता। इसमें शनि देव बड़ी-बड़ी परेशानियां और बड़े-बड़े कष्ट प्रदान करते हैं।
शश महापुरुष योग होने के बावजूद कष्ट और परेशानियां बनी रहेंगी।
आमतौर पर साढ़ेसाती लगभग सभी राशि वालों के लिए जाते जाते शुभ फल दे जाती है। किंतु वृश्चिक राशि वालों का मामला कुछ अलग होता है। इसमें साढ़ेसाती जाते-जाते सब कुछ ले जाती है। संघर्ष बढ़ेगा। घर परिवार में व्यर्थ का कलह, व्यर्थ का तनाव बढ़ जाएगा। प्रतिदिन घर में बेहद तनाव की स्थिति बनी रहेगी। इस समय कोई भी नया कार्य आरंभ ना करें। खर्च पर नियंत्रण रखें। जरूरत पड़ने पर पुराने मित्रों से सहयोग लेना अच्छा रहेगा। प्रेम संबंधों में कष्ट पैदा होगा। दूरियां बढ़ेगी। परेशानी होगी। चतुर्थ स्थान काल पुरुष की कुंडली में चंद्रमा का माना जाता है और हृदय का स्थान होता है। यही कारण है कि चौथे घर में किसी भी पाप ग्रह का होना शुभ नहीं माना जाता। शनिदेव पाप ग्रह होने के कारण जीवन में उथल-पुथल मचा देंगे। नए-नए शत्रु उभरकर सामने आएंगे। हालांकि शनि देव की तीसरी दृष्टि के कारण कोई भी शत्रु आपके समक्ष अधिक देर तक टिक नहीं पाएगा। शनिदेव उसे परास्त कर देंगे। आपको विजय दिलाएंगे। किंतु शत्रु पैदा होंगे जरूर। हर कार्य में देरी होगी। शनिदेव की दसवीं दृष्टि लग्न पर पड़ने के कारण हर कार्य विलंब से होगा। कुल मिलाकर देखा जाए वृश्चिक राशि वालों के लिए परेशानियों से भरा यह समय होगा। यदि जन्म कुंडली में शनि और चंद्रमा का कोई सीधा सीधा संबंध नहीं बन रहा है तब चौथे घर में शश महापुरुष योग का शुभ फल यह प्राप्त होगा कि नया घर मकान प्राप्त होगा। नया वाहन प्राप्त होगा। अधूरा पड़ा घर पूरा हो जाएगा। किंतु पारिवारिक, मानसिक और शारीरिक कष्ट बना ही रहेगा।
लोहे का छल्ला धारण करना इस गोचर में अत्यंत शुभ फलदायक होगा। श्री हनुमान जी की आराधना पूजा, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करना शुभ फलदायक होगा। शनिवार के दिन सूर्योदय से पूर्व पीपल के वृक्ष में जल और तिल अर्पित करना कई तरह की परेशानियों से राहत देने का कार्य करेगा।
धनु राशि: धनु लग्न और धनु राशि वालों के लिए तीसरे घर में शनि का यह गोचर अत्यंत शुभ फलदायक होगा। तीसरे घर में शनि देव अति विशिष्ट कारक बन जाते हैं। अतः बहुत दिनों से रुके पड़े आपके सारे काम अब पूरे होने लगेंगे। जीवन में नई शुरुआत होगी। पुरुषार्थ के कारण आपको विशेष सफलताएं प्राप्त होंगी। मन प्रसन्न होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि पैदा होगी। छोटी बड़ी यात्राएं होंगी और यात्राओं से विशेष लाभ प्राप्त होगा। नौकरी, व्यापार, व्यवसाय हर क्षेत्र में लाभ मिलेगा। कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता प्राप्त होगी।
धनु राशि के अधिपति देव गुरु बृहस्पति होते हैं जो इस समय चौथे घर में धनु राशि से चतुर्थ स्थान में पाप कर्तरी योग में होने के कारण हंस महापुरुष योग के बावजूद शुभ फल प्रदान नहीं कर पाएंगे। जिसके कारण आपकी माता का स्वास्थ्य खराब होगा। माता को लेकर कई प्रकार की चिंता बनेगी। गृह कलह की संभावना बन रही है। इस समय आपके अपने मित्र भी शत्रु बन जाएंगे और आपके साथ बुरा बर्ताव करेंगे। यदि आप राजनीति में हैं तो आपके ऊपर कोई बड़ा आरोप लग सकता है। जिसके कारण समाज में, परिवार में आप को अपयश और बदनामी का सामना करना पड़ेगा। प्रेम संबंधों में परेशानियां पैदा होंगी। प्रेम संबंध टूटने की संभावना है। पढ़ाई लिखाई में कष्ट का सामना करना पड़ेगा। शिक्षा में व्यवधान पैदा होगा। किंतु उच्च शिक्षा में अधिक परेशानी नहीं होगी। पेट से संबंधित रोग, गैस से संबंधित रोग परेशान करेंगे। बच्चों के व्यवहार से मन दुखी रहेगा। घर का वातावरण अच्छा नहीं रहेगा। जिसके कारण स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाएगा। आपको इस समय धोखा मिलने की प्रबल संभावना है। खर्च बढ़ा चढ़ा रहेगा। सोच समझकर खर्च करें। अन्यथा धन से संबंधित परेशानी आ सकती है।
गुरुवार के दिन केले के पौधे को जल अर्पित करें और शनिवार की सूर्योदय से पूर्व पीपल के पौधे में जल अर्पित करें और श्री हनुमान जी की आराधना स्तुति करते रहे राहत मिलेगी।
मकर राशि: मकर लग्न और मकर राशि से द्वितीय घर में शनि का यह गोचर मध्य ढैया का प्रभाव देगा।
17 जनवरी 2023 से शनिदेव का अपने मूल त्रिकोण राशि, कुंभ राशि में प्रवेश करते ही मकर राशि वालों की साढ़ेसाती का प्रभाव उतरती हुई साढ़ेसाती के रूप में होगा। अर्थात शनिदेव का प्रभाव पैरों पर होगा। इस समय विशेष सतर्क सावधान रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखें। किसी तरह की चोट चपेट, दुर्घटना से सावधान रहें। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। रास्ते पर चलते समय पैरों का बहुत ध्यान रखें। पैरों में किसी तरह की कोई चोट चपेट या दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। गृह कलह की स्थिति बन रही है। माता के लिए समय शुभ नहीं है। आपकी माता के लिए बहुत ही कष्टदायक समय हो सकता है। अतः आप स्वयं का और अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। घर परिवार में आपस में तनाव, बहस, रंजिश की संभावना बन रही है। आपका अहंकार बढ़ेगा। आपकी वाणी में उग्रता बढ़ेगी। जिसके कारण आपके शत्रु बनेंगे।
धन स्थान पर स्वग्रही शनि के प्रभाव से धन का आगमन होता रहेगा। आर्थिक तंगी दूर होगी। आमदनी बढ़ेगी। नौकरी पेशा लोगों के लिए, व्यापारियों के लिए और विद्यार्थियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा। ना विशेष लाभ होगा न किसी प्रकार की कोई हानि होगी। कुल मिलाकर यह समय ठीक-ठाक बीतेगा।
सिर्फ अपने स्वास्थ्य का और अपने वाणी और व्यवहार का बहुत ध्यान रखें।
कुंभ राशि: कुंभ लग्न और कुंभ राशि के लग्न में ही शनिदेव का यह गोचर शश महापुरुष योग बना रहा है। लग्न में अथवा राशि पर शनि का होना शुभ नहीं माना जाता। अतः शश महापुरुष योग होने के बावजूद भी मिलाजुला फल मिलेगा। शनि की सातवीं दृष्टि के प्रभाव से दांपत्य जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। आपका क्रोध बढ़ेगा। भागदौड़ बढ़ेगी। प्रत्येक कार्य में विलंब होगा। प्रत्येक कार्य के लिए आपको अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ेगा। आपकी सोच में उग्रता पैदा होगी। आपके व्यवहार में उग्रता पैदा होगी। आपके अंदर जिद की मात्रा बढ़ेगी। मानसिक अशांति रहेगी। आप मानसिक रूप से बेहद परेशान होंगे। आपके वाणी और व्यवहार के कारण प्रिय जनों से आपको दूर होना पड़ सकता है।छोटे भाई बहनों से परेशानी होगी। पिता से अलगाव पैदा होगा। पिता के साथ रिश्तो में दरार पड़ेगी।
हालांकि व्यापारियों के लिए यह समय ठीक रहेगा। रोजगार, व्यवसाय का काम चलता रहेगा। आमदनी आती रहेगी। धन का आगमन होता रहेगा। फिर भी हमेशा कुछ न कुछ चिंता लगी रहेगी। कोई भी काम समय पर पूरा नहीं होगा। हर कार्य में देरी होगी। नौकरी पेशा लोगों के लिए यह समय ठीक है। हालांकि नौकरी में परिवर्तन का योग बन रहा है। एक नौकरी जाएगी तो दूसरी नौकरी आ जाएगी। दांपत्य जीवन में परेशानी की स्थिति बन रही है। यदि पहले से कोई विवाद चल रहा हो तो दांपत्य जीवन में तलाक होने की संभावना बन रही है। स्थान परिवर्तन का योग बन रहा है। आप अपने वर्तमान स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने जाएं अथवा आपके घर में कुछ ऐसा परिवर्तन हो कि आप अपने एक कमरे से दूसरे कमरे में स्थान परिवर्तन कर ले। अपनी वाणी और व्यवहार अच्छा रखें ताकि कोई शत्रु ना बने।
हनुमान जी की उपासना, सुंदरकांड का पाठ और शनि के मंत्रों का जाप आप को राहत प्रदान करेगा।
मीन राशि: मीन लग्न और मीन राशि के 12 में घर में शनि का यह गोचर कई तरह की परेशानियां लेकर आ रहा है। 17 जनवरी 2023 से शनिदेव के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही मीन राशि वालों की साढ़ेसाती पूरी तरह से आरंभ हो जाएगी। बारहवें घर में शनि शुभ फल प्रदान नहीं करते। व्यर्थ का विवाद, व्यर्थ की भागदौड़, व्यर्थ का खर्च, कई तरह की परेशानियां पैदा करेगा। खर्च की अधिकता रहेगी। जिसके कारण कर्ज लेना पड़ेगा। क्रोध बढ़ेगा। वाणी में कड़वाहट पैदा हो जाएगी। शनि की तीसरी दृष्टि के प्रभाव से धन का नाश होगा। पहले से जमा किए हुए धन का भी नाश होगा। शनि की सातवीं दृष्टि के प्रभाव से कोर्ट कचहरी का चक्कर लग सकता है। किसी कानूनी विवाद में पड़ने का योग है। किसी चोट चपेट से परेशानी हो सकती है। कइ बड़ी दुर्घटनाओं के योग भी बन रहे हैं और इस समय चारों तरफ से शत्रुओं का हमला होगा। जिससे मन बड़ा अशांत रहेगा। शत्रुओं से बेहद कष्ट और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। दांपत्य जीवन बेहद खराब स्थिति में होगा। जीवन साथी के साथ वाद विवाद, परेशानियां और दुख की स्थिति बन रही है। शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक हर तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में किए गए आपके अशुभ कर्मों का भरपूर अशुभ फल शनि देव प्रदान करेंगे। धन जमा नहीं हो पाएगा। पैसे की तंगी बनी रहेगी। रोग, ऋण, शत्रु बेहद परेशान करेंगे। व्यर्थ की यात्राएं होंगी। यात्रा में हानि और नुकसान का सामना करना पड़ेगा। पिता के सुखों में कमी आएगी। पूजा पाठ धर्म-कर्म में रुचि समाप्त हो जाएगी। ईश्वर पर विश्वास कम होगा। धर्म के मामले में व्यर्थ के वाद विवाद करेंगे। आपके मन में धर्म और देवी-देवताओं के प्रति कुतर्क बढ़ेगा। जिससे आपके जीवन में अत्यंत कष्ट प्राप्त होंगे। आपके घर परिवार कुटुंब में तनाव और अलगाव की स्थिति बनेगी। पैतृक संपत्तियों का बंटवारा होगा। इस समय वाणी पर नियंत्रण रखना अत्यधिक आवश्यक है। क्योंकि शनि की तीसरी दृष्टि प्रभाव के कारण आप कड़वी और अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे। जिसके कारण आपको बेहद परेशानियों और कष्टों का सामना करना पड़ेगा। अपने खान-पान पर विशेष नियंत्रण रखें। मांस मदिरा के सेवन से बचें। गैरकानूनी काम करने से बचें। गलत संगति से बचें। इस समय आपको गलत सलाह देने वाले, गलत किस्म के मित्र और सहयोगी मिल जाएंगे। जिनके कारण जीवन में दुख उठाना पड़ेगा। दांपत्य जीवन में बेहद परेशानी और गृह कलह का भी आपको भयंकर सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर यह समय बेहद खराब बीतने वाला है।
उपाय : लोहे का छल्ला धारण करें। शनिवार के दिन सूर्योदय से पूर्व पीपल के वृक्ष में तिल और जल अर्पित करें। श्री हनुमान जी की प्रतिदिन साधना उपासना करें। सुंदरकांड का पाठ करें। गायत्री मंत्र का जाप करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें।
मांस मदिरा का त्याग करें।
इति शुभमस्तु!! नमः शिवाय!!
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