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चल चलो साथ

चल चलो साथ

         ---:भारतका एक ब्राह्मण.
            संजय कुमार मिश्र'अणु'
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तेरे चेहरे पर
तेज दमक रहा है
और छोटी सी लाल विंदी
विखेर रही है अपनी आभा
तुम्हें देख रही है आंखे
प्रसन्न हो रहा है मन
लग रही हो सचमुच नई दुल्हन
वो तेरी बोली
है बडी मीठी और प्यारी
थिरक रहा महफिल
धडक रहा है हरेक दिल
पड गई अकेली तु सब पर भारी
तभी तो जगी है चाहत
और कर रहे सब मगज मारामारी
बस तु ऐसे हीं
सबसे दिन चहकती रहो
इस निराशा भरी दुनियां में
बनकर एक नई किरण
जिसे चाहते सब के सब
कि हम कर लें वरण
मानकर नियति
सब भिंडा रहे है युक्ति
आखिर कौन है
ये नवल-धवल अपूर्व युवती
सब दे रहा है निमंत्रण
खोकर खुद पर नियंत्रण
अरे वो अपूर्व सुंदरी
धारण कर लो मेरी मुंदरी
अपना बना लो मुझे
ओढ ले ये मेरी लाल चुनरी
            पकड मेरा हाथ।
            चल चलो साथ।।
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वलिदाद,अरवल(विहार)८०४४०२.
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