चीन पर सटीक प्रहार
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने विस्तारवादी चीन पर बहुत सही समय पर प्रहार किया है। इससे पहले चीन ने अमेरिका को भी धमकी दे दी थी लेकिन भारत ने वियतनाम के साथ समझौता किया तो चीन की समझ मंे नहीं आ रहा है कि वह क्या जवाब दे। चीन ने पिछले दो महीने मंे दक्षिण चीन सागर मंे अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ा दी। इससे सबसे ज्यादा परेशानी वियतनाम को हो रही है। वियतनाम ने पिछले दिनों अपने दर्द को भारत के सामने फिर रखा। इससे पहले 2020 से ही वियतनाम दक्षिण चीन सागर मंे चीन की खतरनाक गतिविधियों के चलते अपनी दिक्कतें भारत को बताता रहा है। चीन ने दक्षिण चीन सागर मंे बड़ी संख्या में जहाजों और लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रखी थी। भारत की सेनाओं के साथ भी पूर्वी लद्दाख मंे तनातनी चल रही है। यही देखते हुए भारत-वियतनाम ने रक्षा समझौता किया है। इससे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र मंे चीन की दादागिरी पर लगाम लगायी जा सकती है। यह संधि 2030 तक के लिए की गयी है जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वियतनाम के जनरल जियांग के बीच यह समझौता विश्व की राजनीति मंे दूरगामी साबित हो सकता है।
संभवतः यही कारण है कि चीन की भारत को घेरने की कोशिशों के जवाब में भारत ने आक्रामक विदेश नीति दिखाते हुए वियतनाम के साथ अहम समझौता किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जनरल जियांग के बीच हनोई में हुई बैठक में 2030 तक द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी के लिए साझा विजन दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर हुए। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती दादागीरी को देखते हुए इससे दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में रक्षा व सुरक्षा सहयोग और बढ़ाने में मदद मिलेगी। वियतनाम उन देशों में शामिल है जिनके साथ दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन का विवाद चल रहा है। वहीं, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत के साथ भी चीन के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों मंत्रियों ने वियतनाम को भारत से मिलने वाले 50 करोड़ डॉलर के रक्षा कर्ज को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा साझेदारी को समृद्ध करने के लिए आगे के रास्ते तलाशने पर भी सहमति जताई गई है। चीन के इन दिनों यूं तो काफी देशों के साथ रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं लेकिन वह किसी न किसी से आए दिन पंगे लेने से बाज नहीं आ रहा। चीन ने वियतनाम से पंगा लेते हुए बॉर्डर के पास मिसाइल बेस बनाया है। चीनी सेना ने यहां जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को तैनात किया है। वियतनाम के विदेश मंत्रालय ने एक एनजीओ की सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रही चीनी मिसाइल बेस को लेकर जांच कराने की बात की थी। दरअसल, चीन वियतनाम से उसी दिन से चिढ़ा हुआ है जब से वियतनाम के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
वियतनामी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ले ती तू हांग कहते हैं कि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में आई इस तस्वीर के सत्यता की हम जांच कर रहे हैं। चीन का यह मिसाइल बेस वियतनाम की सीमा से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर बना है। बताया जा रहा है कि वियतनाम के साथ संबंधों में आई खटास के बाद दबाव बनाने की रणनीति के अंतर्गत चीन ने इस मिसाइल बेस को गुआंग्शी प्रांत के निगमिंग काउंटी में तैयार किया है। साउथ चाइना सी नाम के एनजीओ ने चीन की चाल का खुलासा करते हुए कहा कि इस मिसाइल बेस के पास ही एक हेलिकॉप्टर बेस को भी बनाया गया है। इस सैटेलाइट तस्वीर में मिसाइल के 6 लॉन्चर साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले ही चीन ने ऐलान किया था कि उसकी वायुसेना के बमवर्षक विमानों ने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रुजवेल्ट पर हमले की मॉक ड्रिल की है। वियतनाम, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन) का एक अहम देश है और उसका दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद है। भारत, दक्षिण चीन सागर में वियतनामी समुद्र क्षेत्र में तेल निकालने संबंधी परियोजनाएं चला रहा है। भारत और वियतनाम साझा हितों की रक्षा के वास्ते पिछले कुछ वर्षों में अपने समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने जियांग से भेंट के बाद कहा, ‘वियतनाम के साथ भारत के करीबी सुरक्षा संबंधों से हिंद-प्रशांत में स्थिरता आएगी।’ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तीन दिनी दौरे पर हनोई पहुंचे थे और इस दौरान राष्ट्रपति नुयेन शुआन फुक से भी भेंट की। दोनों नेताओं के बीच संपूर्ण रणनीतिक संबंधों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। वियतनाम ने चीन की गतिविधियों के चलते दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बारे में भारत को अवगत कराया है। अनेक देशों के संयम बरतने के आह्वान की परवाह किए बिना चीन संसाधन प्रचुर दक्षिण चीन सागर में बड़ी संख्या में पोतों और लड़ाकू विमानों की तैनाती कर अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है।
वियतनाम ने दो साल पहले भी चीन की इन गतविधियों के चलते क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर भारत को जानकारी दी थी। यह मुद्दा विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से वियतनाम के राजदूत फाम सान्ह चाउ की मुलाकात के दौरान उठा था। उन्होंने बताया कि वियतनाम के राजदूत ने भारत के तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की तेल खोज परियोजनाओं की मौजूदगी वाले वियतनामी जलक्षेत्र के इर्द-गिर्द सहित दक्षिण चीन सागर में वर्तमान स्थिति के बारे में श्रृंगला को अवगत कराया। दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधि ऐसे समय जब उसकी और भारत की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में तीन महीने से अधिक समय से तनातनी चली आ रही थी।
चीन बड़ी मात्रा में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी वाले समूचे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। हालांकि, वियतनाम, फिलीपीन और ब्रुनेई सहित कई आसियान देश भी क्षेत्र पर अपना जवाबी दावा करते हैं।
वर्ष 2014 में पार्सल द्वीप समूह पर चीन की तेल संबंधी कवायद के चलते वियतनाम में चीन विरोधी दंगे भड़क उठे थे जिनमें अनेक चीनी कारखानों को नुकसान पहुंचा था। भारत दक्षिण चीन सागर में समुद्री कानून संबंधी 1982 की संयुक्त राष्ट्र संधि सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता और संसाधनों तक पहुंच का समर्थन करता रहा है। दक्षिण चीन सागर भारत के लिए भी बेहद महत्वूपर्ण है क्योंकि देश का 55 प्रतिशत व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। चीन दक्षिण चीन सागर में वियतनामी जलक्षेत्र में भारत की तेल खोज परियोजनाओं पर आपत्ति व्यक्त करता रहा है। भारत यह कहकर उसकी आपत्ति को खारिज करता रहा है कि वियतनाम के साथ उसका ऊर्जा सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप है। चीन ने पिछले दो महीनों में दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ा दी। अमेरिका ने चीन की हरकतों के जवाब में विवादित द्वीपसमूह के पास अपने सैन्य पोत भेज दिए और कहा कि क्षेत्र पर बीजिंग का दावा अवैध है।भारत और वियतनाम के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा एवं सैन्य संबंधों में काफी वृद्धि हुई है। दोनों देशों ने एक दशक तक रणनीतिक भागीदार रहने के बाद 2016 में अपने संबंधों के दर्जे को बढ़ाकर ‘‘समग्र रणनीतिक भागीदारी’’ के स्तर का कर दिया था। अब इसमंे एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
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