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हर मौसम में मोहब्बत

हर मौसम में मोहब्बत

मोहब्बत मौसम के अनुसार 
बहुत लोग करते है। 
गरजते बदल की तरह
मोहब्बत भी गरजती है। 
घटाये छाती है जैसी
मोहब्बत भी छा जाती है। 
बरसते पानी की तरह 
मोहब्बत बरसने लगती है।। 

मोहब्बत जबा दिलों में
हर मौसम में पनापती है। 
भले ही मौसम कैसा हो
मोहब्बत हमेशा खिलती है। 
पूनम की चांदनी रात में
मोहब्बत बहुत महकती है। 
लिपटकर बाहों में दोनों की
मोहब्बत आह भरती है।। 

मोहब्बत को जो समझते है
वो ही इसको को करते है। 
और अपने अपने रूप को
मोहब्बत में समर्पित करते है। 
तभी तो युवा दिलों में 
मोहब्बत रंग जमती है। 
और नये नये लोगों को
मोहब्बत करना सिखाती है।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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