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दर्द-ए-ग़ज़ल

दर्द-ए-ग़ज़ल 

सुमित मानधना 'गौरव' सूरत
लोग कहते हैं हमें आप बहुत हँसाते है,
किसे पता हँसी के पीछे ग़म छुपाते हैं!

ज़ख्म तो हमारे सीने में गहरे है मगर ,
किसी को भी हम यह नहीं बताते हैं।

कोई जब पूछ ले हाल हमारा जनाब,
मजे में है हँसते हुए उन्हें ये सुनाते हैं।

आज भी उनसे मोहब्बत है उतनी,
हम कहाँ लेकिन किसी को जताते हैं।

दोस्तों के बीच में रहते हैं दुश्मन यहाँ,
आस्तीन में अपने खंजर वो छुपाते हैं।

दिखाने को बढ़ाते हैं दोस्ती का हाथ,
एहसान फरामोश पीठ पे वार करते हैं।

कितनी मोहब्बत लूटा लो इन पर,
हुस्न वाले आखिर में दगा दे जाते हैं।

यही इस दुनिया की रीत है सुमित,
वफा करने वाले बेवफ़ाई ही पाते है।

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