Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

विशेष है सावन का पहला प्रदोष

विशेष है सावन का पहला प्रदोष

(मोहिता स्वामी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
सहज ही प्रसन्न होकर सब कुछ प्रदान करने वाले भगवान शिव को प्रत्येक महीने की द्वादशी और त्रयोदशी की संधि बेला अर्थात् प्रदोष काल में पूजने से विशेष फल मिलता है। यह प्रदोष अगर सोमवार के दिन पड़ जाए तो सोने में सुहागा है। सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिवस है। यह प्रदोष सोमवार के सावन महीने में हो तो शुभ योगों का भंडार हो जाता है। इस बार 25 जुलाई को सावन का पहला प्रदोष सोमवार के दिन है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार व्रत भी है। सावन सोम प्रदोष व्रत के दिन अत्यन्त ही शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन दो राजयोग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। इस वजह से यह दिन पूजा पाठ आदि की दृष्टि से बेहद ही महत्वपूर्ण है। जो लोग पूरे वर्ष प्रदोष व्रत रखना चाहते हैं, वे इस दिन से इसका प्रारंभ कर सकते हैं क्योंकि यह दिन बेहद शुभ संयोगों में है।

सावन कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 25 जुलाई, सोमवार, शाम 04 बजकर 15 मिनट से सावन कृष्ण त्रयोदशी तिथि की समाप्ति 26 जुलाई, मंगलवार, शाम 06 बजकर 46 मिनट पर है। शिव पूजा का प्रदोष मुहूर्त शाम 07 बजकर 17 मिनट से रात 09 बजकर 21 मिनट तक है। भारतीय पंचांग के आधार पर देखा जाए तो एक साल में कुल 24 प्रदोष व्रत होते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। हर माह की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है क्योंकि इस तिथि के अधिपति देव भगवान शिव शंकर हैं। वैसे तो पूरे वर्ष के प्रदोष व्रत महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन सावन माह के दो प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है क्योंकि ये शिव प्रिय मास में पड़ते हैं। सावन माह भोलेनाथ को प्रिय है और इस माह के प्रदोष व्रत को करने से अनन्त फल की प्राप्ति होती है। इस दिन आप दान-पुण्य करके और पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करके प्राप्त होने वाले शुभ फल को कई गुना बढ़ा सकते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, सावन सोम प्रदोष व्रत पर बना यह शुभ संयोग अधिक शुभफलदाई सिद्ध होगा।

पूरे सावन माह में विधि विधान से शिव जी की पूजा-अर्चना की जाती है। सभी लोग उनकी पूजा में कम से कम गाय का दूध, गंगाजल, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाते हैं। लेकिन कई बार लोग अनजाने में शिव जी की पूजा में ऐसी वस्तुएं भी चढ़ा देते हैं, जो उनके लिए वर्जित मानी गई हैं। शिव पूजा में भूलवश भी उन वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। देवताओं को उनकी प्रिय वस्तुएं ही अर्पित करते हैं, ताकि वे प्रसन्न हों और मनोकामनाओं की पूर्ति करें। शिव पूजा में वर्जित वस्तुएं इस प्रकार हैं-

तुलसी का पत्ता-भगवान शिव की पूजा में तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाते हैं क्योंकि भगवान शिव ने वृंदा के पति असुरराज जालंधर का वध किया था। उसके बाद वृंदा ने स्वयं अपना जीवन समाप्त कर लिया और जहां उन्होंने प्राण त्याग किया, उस स्थान पर तुलसी का पौधा उग आया।

नारियल या श्रीफल-शिव पूजा में नारियल या श्रीफल वर्जित है। श्रीफल का संबंध माता लक्ष्मी से है और वे भगवान विष्णु की पत्नी हैं। इस वजह से भगवान शिव को नारियल अर्पित नहीं करते हैं।

सिंदूर या कुमकुम-लोग भूलवश माता पार्वती के साथ शिव जी को भी सिंदूर या कुमकुम लगा देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि सिंदूर श्रृंगार से जुड़ी वस्तु है और शिव स्वयं संन्यासी और तपस्वी हैं। उनको सिंदूर या कुमकुम न लगाएं।

हल्दी-शिव जी की पूजा में हल्दी का भी उपयोग नहीं किया जाता है। हल्दी को भी श्रृंगार और सौंदर्य से जुड़ी वस्तु माना जाता है। यह भी शिव पूजा में वर्जित माना गया है।

शंख-भगवान शिव की पूजा करते समय शंख का उपयोग नहीं करते हैं। जैसे शंख में गंगाजल भरकर शिव जी का अभिषेक करना। भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था, तो उसके हड्डियों से शंख का निर्माण हुआ। इस वजह से शिव पूजा में शंख वर्जित है।

केतकी का फूल-शिव जी केतकी के फूल को अपनी पूजा में स्वीकार नहीं करते हैं। इसका कारण है कि केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, तब से केतकी का फूल शिव जी से शापित है। इसकी कथा शिवपुराण में है।

ये फूल भी हैं वर्जित-शिव पूजा में केवड़े का फूल, कनेर, कमल और लाल रंग के फूल वर्जित हैं। शिव जी को सफेद रंग वाले फूल चढ़ाने चाहिए।

तिल और टूटे अक्षत्-शिव पूजा में तिल और टूटे अक्षत् का उपयोग नहीं करते हैं। माना जाता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मैल से हुई थी, वहीं अक्षत् का अर्थ क्षति से रहित अर्थात् आप जो भी चावल अक्षत् के रूप में चढ़ाते हैं, वह पूरा होना चाहिए, टूटा हुआ नहीं।

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र

शिव पंचाक्षर मंत्र-ओम नमः शिवाय शिव पंचाक्षर मंत्र है। यह मंत्र सरल और प्रभावशाली है। इस मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस मंत्र का उच्चारण आसान है। इसे शिव जी का मूल मंत्र भी कहा जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र-

ओम त्र्यंम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

यदि आप किसी संकट में घिरे हैं, असाध्य रोग से पीड़ित हैं, अकाल मृत्यु का भय है, तो आपको महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि आप स्वयं नहीं कर सकते हैं, तो किसी योग्य ज्योतिषाचार्य या पंडित की मदद ले सकते हैं। महामृत्युंजय मंत्र का लघु रूप भी है। आप उसका भी जाप करा सकते हैं। शिव रक्षा स्तोत्र-याज्ञवल्क्य ऋषि ने इसकी रचना की थी। सावन में आप प्रत्येक दिन शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। शिव तांडव स्तोत्र-रावण ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी। सावन में आप शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करके शिव कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ