जब कभी मन मे व्यथा हो
आँसूओं का संग जुदा हो
बात मन की कह सको ना
तब मुझे तुम याद करना।
मुझसे तुम संवाद करना
व्यक्त सब जज्बात करना
मै सुनूँगा सब धीर रखकर
और मार्ग भी प्रशस्त करूँगा।
जानता हूँ बहुत कठिन यह
गैर से निज जज्बात कहना
पीर जब नासूर बनने लगे
बेहतर होता उपचार करना।
है यही बस वश मे अपने
दीप बन जल सकूँ तम मिटाऊँ
खुद की खातिर जी चुका हूँ
अब मैं किसी के काम आऊं।
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