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प्रेम बरसेगा

प्रेम बरसेगा

चिराग ये दिलमें जलाओगें 
तो प्रेम बरसेगा।
प्यार का उदय दिलमें
निश्चित ही होगा। 
जो प्रेम को इबादत 
और साधना समझते है।
मोहब्बत का रस पान
ऐसे ही लोग कर पाते है।। 

दिले नादान जो होते है वो
प्यार मोहब्बत कर नहीं पाते।
क्योंकि प्यार करना 
इतना आसान नहीं होता।
ये तो एक तपस्या और
साधना होती है।
जो अन्तरात्माओं के 
मिलन से जन्म लेती है।।

आजकल तो मोहब्बत को
प्रेम वासना से देखते है।
जिस्म की प्यास बुझाने
के लिए मोहब्बत करते है।
पर रब ने भी ऐसा लोगों 
को सबक सिखाया है।
और उनका जीवन 
अधूरा बनाया है।।

प्यार को प्यार से जीतोगें
तो प्यार तुम पाओगें।
जिंदगी की हर खुशी को
तुम निश्चित ही पाओगें।
क्योंकि रब भी उन्हीं के
जीवन में प्रेमरस बरसातें।
जो प्यार मोहब्बत को 
एक इबादत समझते है।।

जय जिनेन्द्र 
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