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भारत के मुसलमानों का दर्द …………

भारत के मुसलमानों का दर्द …………

इमरान प्रतापगढ़ी जी की एक रचना फेस बुक पर पोस्ट है जिसमे भारत के मुसलमानों के दर्द को दर्शाने का प्रयास किया गया है और नरेंदर मोदी पर सवालिया निशान भी लगाया गया है। हमारा बस इतना ही कहना है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, गरीबी किसी धर्म का प्रतीक नहीं है, शिक्षा या ज्ञान किसी की बपौती नहीं है। मगर देश हम सब का है, इस की अस्मिता पर कोई भी आँख उठाये हमें एक जुट होकर उसकी निंदा तथा देश की रक्षा करनी चाहिए। 

इतिहास गवाह है कि भारत सदा से सनातन धर्म को मानने वाला देश रहा है। वसुधैव कुटुंब की अवधारणा रही है। यहाँ शान्ति को मूल मंत्र माना गया। जनाब हज़रत मोहम्मद साहब ने भी इस्लाम धर्म शुरू करने से पहले भारत की यात्रा की थी। एन्साइक्लोपिडिया ऑफ़ इस्लाम के अनुसार इस्लाम धर्म की शुरुवात 632 ईसवी के आसपास मानी जाती है। इससे पूर्व वहाँ पर सनातन धर्म का ही प्रभुत्व था। 3139-  3138 ईसा पूर्व महाभारत युद्ध के बाद युद्ध से विस्थापित लोग थे इन लोगो को वेद की मैत्रायिनी शाखा के प्रतिनिधि माना जाता है।
1600- 1200 मितन्नी वंश, राजधानी का नाम था वसुखानी यानी धन की खान। यहाँ के लोगो के सम्बन्ध मिश्र से थे ।
1350- 1322 ईस्वी के मध्य संधि दस्तावेज में इन्द्र, मित्र, वरुण, अश्विनी कुमारों को शकशी के रूप में लिखा गया है ।
570 ईसवी में पैगम्बर मुहम्मद साहब के जन्म के समय अरब में केवल सनातन यानी हिन्दू धर्म ही था ।
 
गौर तलब है कि इस्तांबुल टर्की के राजकीय पुस्तकालय मक्तब ए सुल्तानिया के अरबी विभाग में “शायर उल ओकुल“ नामक हस्तलिखित ग्रन्थ जिसे बग़दाद के खलीफा हारून उल रशीद साहब के अरबी कवि अबू आमिर अब्दुल अस्मई ने तैयार किया था, उसमे सम्पूर्ण इतिहास दर्ज है।
 
यहाँ पर यह सब बताने का मतलब कोई भेदभाव खडा करना नहीं अपितु यह समझने का प्रयास करना है कि इतिहास में बहुत कुछ होता है लेकिन सभी धर्मों के लोग तथा नेता अपने स्वार्थों के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को बताते हैं और बार बार उसे बता कर सही साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
मुग़ल काल में भारत का इतिहास किसी भी दृष्टि से भारत का स्वर्णिम इतिहास नहीं कहा जा सकता । किसी भी धर्म की नीव या किसी राजा की सल्तनत यदि जनता का क़त्ल करके खड़ी हुई हो तो डर की वजह या निजी स्वार्थों की वजह से उसे स्वीकार तो किया जाता है मगर  दिल से नहीं।
जर्हम बिन्तोई नामक कवि जो मक्का के जर्हम राजकुल से ताल्लुक रखता था तथा जिसके कुल के 12 शासकों ने मक्का पर 74 ईशा पूर्व से 206 ईशा तक शासन किया था , ने हज़रत मुहम्मद साहब से 165 वर्ष पूर्व  अपनी कविताओं में सम्राट विक्रमादित्य का वर्णन किया था तथा उनकी यह कवितायें ओकाज में होने वाले कवि सम्मलेन में स्वर्ण पत्र पर लिखकर मक्केश्वर महादेव मंदिर के गर्भ गृह में टांगी गई थी।
 
इतिहास में बहुत कुछ है, हमारा उद्देश्य कोई विवाद खडा करना नहीं है मगर निवेदन करना चाहते हैं कि वर्तमान दौर में दुनिया बहुत छोटी हो गई है, हमारी या किसी नेता अथवा धर्म गुरु की बात पर यकीन मत कीजिये, स्वयं तथ्यों को जानिये, जो भी गलत है उसकी खुले दिल से निंदा तथा सही की प्रसंशा कीजिये।
 
जनाब इमरान प्रतापगढ़ी जी की कविता के सन्दर्भ में मेरी रचना पर गौर फरमाएं 

यूँ ही किसी पर कोई इल्जाम नहीं लगाता?
 
कश्मीरी ब्राह्मणों से कश्मीर क्यों खाली कराया गया,
क्यों नहीं वहां के रहनुमाओं पर कोई इल्जाम लगाता?

बात करते हो गुजरात में मासूमों के कातिल की,
क्यों नहीं रामभक्तों को जलाने का कोई शोक मनाता?
 
यह तो सच है कि सारे मुस्लिम आतंकी नहीं होते,
मुस्लिम आतंकियों पर क्यों, कोई हल्ला नहीं मचाता?
 
कहता रहा जो देश को डायन, आज भी सत्ता में बैठा है,
क्यों नहीं उसके खिलाफ, कोई आवाज़ उठाता?
 
ताजमहल- तेजो महल था, अयोध्या में राम मंदिर,
हकीकत से कोई, क्यों नहीं  रूबरू  कराता?
 
गरीबी का रोना रोते, कहते हैं छप्पर को तरसते,
जनसंख्या नियंत्रण पर, कोई क्यों नहीं विचार करता?
 
कुछ बन गए रहनुमा कौम के, संसद में आ गए,
वन्दे मातरम का विरोध क्यों, कोई नहीं बताता?
 
कसाब और अफज़ल ने किया, देश पर हमला,
कोई भी मुसलमान क्यों, उनके खिलाफ नजर नहीं आता?
 
काट कर सर वतन के सैनिकों का, वो पाक ले गए,
किसी भी मुसलमान को उनका दर्द, क्यों नहीं सताता?
 
कुरआन में गाय को पवित्र माना गया, अरब में कोई नहीं काटता,
भारत में गाय काटने पर क्यों नहीं सवाल उठाया जाता?
 
माना की कानून की खातिर शहीद हुआ, परिवार दुखी है,
कौम के नाम छह को नौकरी, क्यों कोई कानून का मज़ाक उडाता?
 
तोड़ डाली बुद्ध की मूर्ति लखनऊ में, बोद्ध गया में बम विस्फोट,
अमन के दुश्मनों पर कोई प्रश्न चिन्ह, क्यों नहीं लगाता?
 
देखा है दुनिया ने हैदराबाद में, शहीदों का स्मारक तोड़ते,
कोई दारुल उलूम क्यों नहीं उन पर फतवा सुनाता?
 
करते हो बात तरक्की की, कौम को जाहिल भी बनाते,
कुरआन, केवल धार्मिक शिक्षा से कोई तरक्की नहीं पाता।
यह कुछ सवाल हैं जिनका मकसद बस एक ही है कि हम सब सवाल जवाब में उलझे बिना अपनी, देश की तरक्की की बात करें, जो लोग हमें धर्म और जाति तथा क्षेत्र के नाम पर लड़ाते हैं, उनसे सावधान रहें।
 
जय भारत, जय मानवता।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
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