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प्रकृति

प्रकृति

        ---:भारतका एक ब्राह्मण.
          संजय कुमार मिश्र'अणु'
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प्रकृति
नहीं रही है
कभी किसीकी
एक सी
बल्कि वो
बदलती रहती है
सबको अपने साथ
कभी प्रेम से
भरकर मोद
उठाकर गोद
तो कभी कर दो-दो हाथ
जो करती रहती है
हमेशा निर्माण और ध्वंस
क्षण-क्षण,कण-कण,अंस
देकर समय का वास्ता
सृजित कर रास्ता
न किसीसे वैर न तो वह
पालती है प्रीति
बस बनती है निर्दयी
बचाने को रीति
दिखाने को कृति
रहती है सजग सचेष्ट
प्रकृति........  प्रकृति
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वलिदाद,अरवल(विहार)८०४४०२.
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