तुलसीदास की रचनाएं मानवीय मूल्यों का है अनुपम भेंट
जहानाबाद । तुलसी जयंती के अवसर पर सच्चिदानन्द शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित मानवीय जीवन में तुलसी का ग्रंथ की आवश्यकता व8विचार गोष्टी में भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष साहित्यकार इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की सभी ग्रन्थ मानवीय मूल्यों को मार्गदर्शन का कार्य करता है। प्रत्येक वर्ष सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर तुलसीदास का जन्मोत्सव मनाया जाता है। तुलसीदास जी का जन्म 16वीं सदी में हुआ था। तुलसीदास जी ने कई ग्रंथों की रचना की। श्री रामचरितमानस की रचना कर गोस्वामी तुलसीदास हमेशा के लिए अमर हो गए। श्राी राम भक्त हनुमान जी को तुलसीदास का अध्यात्मिक गुरू कहा जाता है। महाबलि हनुमान की उपासना के लिए भी तुलसी दास ने विभिन्न रचनाएं लिखी हैं। जिनमें हनुमान चालिसा और बजरंग बाण आदि प्रमुख हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गुरु माना था। गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा की रचना की थी। तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है । गोस्वामी तुलसीदास का जन्म बचपन में कष्टों से भरा रहा। तुलसीदास जी की माता की मृत्यु के बाद पिता ने त्याग दिया था । तुलसी जयंती पर पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त पदाधिकारी सत्येन्द्र कुमार मिश्र , सेवानिवृत अधिकारी राम विनय सिंह ने गोस्वामी तुलसी के कृतित्व और व्यक्तिव पर प्रकाश देते हुए भारतीय संस्कृति पर मंडराते हुए खतरे से भारतीय समाज को बचाने में गोस्वामी तुलसीदास का महत्वपूर्ण योगदान है । उनके महत्त्वपूर्ण महाकाव्य श्री रामचरितमानस समस्त मानवीय मूल्यों एवं सामाजिक संबंधों की पाठशाला है ।
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