आस्था और विश्वास
कौन राग आलापू भगवन
जिस से तुम आओं।
सुनी पड़ी इस नगरी में
रंग तुम भर जाओं।
प्रभु जी आ जाओं
रंग तुम भर जाओं।
कौन राग आलापू भगवन
जिस से तुम आओं।।
बहुतों को तुमने उभरा
अपने तरीके से।
कोई समझ नहीं पाता
तेरे काम को।
लीला तेरी अपरंपार है
कब कहाँ प्रगट हो जाओं।
देकर दर्शन तुम सबको
कल्याण सभी का कर दो।।
प्रभु जी आ जाओं
रंग तुम भर जाओं।।
भक्तो में बनी रहे आस्था
और बना रहे विश्वास।
इसलिए मैं देता रहता
अपने होने का प्रमाण।
कोई भी भूखा और दुखी
न जाए मेरी चौखट से।
सबको सुख शांति मिले
ऐसा देता हूँ सबको आशीष।।
प्रभु पर करो भरोसा
हरेंगे दुख वो तेरे।।
कौन राग आलापू भगवन
जिस से तुम आओं।
जिस से तुम आओं, तुम आओं।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबईहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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