कभी कभी यूं भी तो अच्छा लगता है,
बचपन का दौर पुराना सच्चा लगता है।
नया दौर पर हम खंडहर तो अर्वाचीन हैं,
अब भी खत से संदेश सुहाना लगता है।
कोरा कागज आया उनका, हमने चिट्ठी समझा,
कुछ नहीं लिखा उसमें, हमने सब कुछ समझा।
रखा है अनमोल खजाना, उनकी यादों का,
ख़त को ही हमने, उनके मन का दर्पण समझा।
ख़त में उनकी बातों की खुशबू है,
तन्हाई में मिलन यादों की ख़ुशबू है।
कभी रूठना कभी मनाना याद सभी,
जुदा हुए उनकी आहों की खुशबू है।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews
https://www.facebook.com/divyarashmimag
0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com