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सृजन के देव विश्वकर्मा

सृजन के देव विश्वकर्मा 

नवसृजन के आदिदेव सृजक विश्वकर्मा महाराज। 
अस्त्र-शस्त्र आयुध पूजा साधक करते पूर्ण काज।

कलाकार कर ध्यान सदा झोली विद्या से भरते।
भवन निर्माण कला कौशल शिल्पी साधना करते।

भित्ति चित्र काष्ठ कला स्वर्ण रजत जवाहरात। 
मुंह बोले मूर्तिकला चित्रकारी की अनोखी बात।

संगीत का हर साज जब साधक स्वर में गाता है।
रचनाकार आदिदेव प्रभु विश्वकर्मा को मनाता है।

कृति रचना शब्द शिल्प बेजोड़ बने सुरलय ताल। 
विश्वकर्मा देव कृपा मिले यश वैभव उन्नत भाल।

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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