अब वही मूँग छाती पे दलने लगा
अब तो पानी भी
सर से गुज़रने लगा ।
आदमी - आदमी
को है छलने लगा ।।
क्यों प्रगति हो रही है
मिरी देखकर।
खाँमखाँ में मेरा खाश
जलने लगा ।।
कैसा मौसम है कैसी
हवा है चली।
रुख ज़माना भी अपना
बदलने लगा ।।
साथ देगा मेरा उसने
वादा किया ।
काम निकला तो फौरन
निकलने लगा।।
जय ने अपना समझ
साथ जिसका दिया।
अब वही मूँग छाती पे
दलने लगा ।।
००
~जयराम जय
पर्णिका,बी-11/1,कृष्ण विहार आवास विकासकल्याणपुर,कानपुर-208017(उ.प्र.)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag
0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com