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तुम हीं थे अपने देश के लाल

देश रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर-:
कविता

तुम हीं थे अपने देश के लाल

शत-शत नमन हे मेरे जय जवान,
तुम ही थे अपनी देश की शान,
पद भी तेरे बहुत छोटे पड़ते थे,
पर तेरा कद था बड़ा महान।
शत-शत नमन हे... ।


तुम हीं थे अपने देश के लाल,
ऊँचा किया भारत का भाल,
त्याग दिया था रेलमंत्री पद को,
बढ़ायी देश की गरिमा व मान।
शत-शत नमन हे... ।


तुम हीं थे नाम,काम से बहादुर,
देश के लिए कुछ करने को आतुर,
दिया जय जवान जय किसान का नारा,
जग में बनायी अपनी पहचान।
शत-शत नमन हे...।


तुम हीं थे देश के शास्त्री,
तुम हीं थे गाँधी के सह यात्री,
कैसे भूल पायेगा यह देश तुझे,
किया तुने देश का कल्याण।
शत-शत नमन हे...।


सब नहीं हो सकता तुम सा संतान,
जिसने दे दी देश के लिए जान,
तुने जवानों का उत्साह बढ़ाया,
बढ़ाया किसानों का आदर-मान।
शत-शत नमन हे...।
-------0------ अरविन्द अकेला,पूर्वी रामकृष्ण नगर,पटना-27
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