दुनियाँ में रहना है
पग पग पर कांटे बिछे
चलना तुम्हें पड़ेगा।
दुनियाँ की जलत को
सहना तुम्हें पड़ेगा।
जीवन के लक्ष्य को
हासिल करना पड़ेगा।
और अपने आपको
दुनियाँ को दिखाना पड़ेगा।।
पग पग पर कांटे बिछे
चलना तुम्हें पड़ेगा।
दुनियाँ की जलत को
सहना तुम्हें पड़ेगा।।
मन माफिक सब को
सब कुछ नहीं मिलता है।
पर फिर भी हम सबको
जीना तो पड़ता है।
लाख बुराईयाँ होकर भी
कुछ तो अच्छाईयां होती है।
जिसके चलते ही हम से
कुछ तो लोग जुड़े है।।
पग पग पर कांटे बिछे
चलना तुम्हें पड़ेगा।
दुनियाँ की जलत को
सहना तुम्हें पड़ेगा।।
छोड़ छाड़ के जग को
क्या तुम जी पाओगें।
अपने लक्ष्य को क्या तुम
हासिल कर पाओगें।
सोचो जरा धैर्य से तुम
सब कुछ तुझे दिखेगा।
जिस पर चलकर ही तू
मंजिल तक पहुँचेगा।।
पग पग पर कांटे बिछे
चलना तुम्हें पड़ेगा।
दुनियाँ की जलत को
सहना तुम्हें पड़ेगा।।
दुनियाँ के गमो से
खुदके गमो को देखो।
फिर अपने गमो को
उनसे तुम तोलो।
फर्क तुम्हें फिर देखो
समझ आ जायेगा।
और ये मूल मंत्र
दुनियाँ को दिखेगा।।
पग पग पर कांटे बिछे
चलना तुम्हें पड़ेगा।
दुनियाँ की जलत को
सहना तुम्हें पड़ेगा।।
जय जिनेंद्रसंजय जैन "बीना" मुंबई
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