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यूपी में केशव का सियासी संकेत

यूपी में केशव का सियासी संकेत

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान फीचर सेवा) 
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बीते दिनों लखनऊ में लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर एक बैठक की थी। इस बैठक के बाद कहा गया कि पार्टी ने आगामी चुनाव के लिए बूथ स्तर से लेकर सभी सात मोर्चों की समीक्षा की है लेकिन अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने नया मोड़ ला दिया है। अगर डिप्टी सीएम की बात सच हुई तो बीते दो चुनावों से अलग यूपी में इस बार चुनाव देखने को मिलेगा। भाजपा मुसलमानों को सक्रिय भागीदारी देना चाहती है। डिप्टी सीएम केशव मौर्य से महापंचायत के दौरान पसमांदा मुसलमानों को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा, मुसलमान भारत में सुरक्षित जीवन जी रहा है और जो कार्यकर्ता हमारा होगा, हम उन्हें टिकट भी देंगे और पहले भी दिया है। लेकिन अगर जीतने लायक नहीं है तो हम केवल गिनती गिनाने के लिए टिकट दे दें कि मुस्लिम को दिया है तो हम हारने के लिए टिकट नहीं देंगे। जब टिकट देंगे तो जीतने के लिए टिकट देंगे। इसी संदर्भ में केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा था अगर अखिलेश यादव मुसलमानों को साथ लेकर चलते तो क्या सत्ता से बाहर जाते। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहे लेकिन इसी यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान हमने 325 विधायकों के साथ सरकार बनाने का काम किया और 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ था तो हम इसी यूपी में 73 सीटों पर जीते थे। डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा अखिलेश यादव ने बीएसपी, कांग्रेस और आरएलडी से गठबंधन भी करके देख लिया, लेकिन उनके गठबंधन करने के बाद भी हमारे 64 सांसद जीतकर लोकसभा में गए। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 में उन्होंने कहा था कि 400 सीट जीतेंगे। मुझे लगा उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहा होगा। अगर स्वास्थ्य ठीक रहता तो 200 या 250 बोलते तो समझ में आता। मौर्य ने कहा 2017 में एकतरफा वातावरण था तब भी हम लोग 265 प्लस बोलते थे। लेकिन जब देखे कि माहौल बहुत अनुकूल है तो हम लोगों ने अबकी बार तीन सौ पार भाजपा सरकार कहा था।
दरअसल, योगी आदित्यनाथ सरकार का पूरा फोकस मिशन 2024 पर है और उन्होंने कैबिनेट सहयोगियों से साफ कह दिया है कि राज्य में सरकार के पांच साल के वादों को अगले दो साल में पूरा करना है और उसके बाद आगे के लक्ष्य तय किए जाएंगे। देश में 2024 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं और तब तक योगी सरकार का पूरा फोकस पार्टी के संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने पर है। आने वाले दिनों में योगी सरकार कई ऐसे कार्यक्रम करती नजर आएगी जिसका सीधा संबंध आने वाले चुनाव से है। योगी के इस नए फरमान के बाद से ही योगी के मंत्रियों में बेचैनी साफतौर पर दिखायी दे रही है। बहुत सारे मंत्री ऐसे हैं जो स्वच्छंद होकर काम करने के आदी है लेकिन योगी के इस फरमान को वह अपने ऊपर एक शिकंजे के तौर पर देख रहे हैं। मंत्रियों को न चाहते हुए भी अब योगी के इस फरमान के हिसाब से अपने कार्यक्रम तय करने होंगे। एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहली बार सीएम ने इस तरह का आदेश जारी किया है। अभी कई लोग वेट एंड वाच की मुद्रा में हैं। जल्द ही इसको अमल में लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले योगी ने फरमान जारी किया था कि मंत्रियों को निजी स्टाफ चुनने की आजादी नहीं होगी। न ही वो पुराने स्टाफ को रख सकते हैं। इससे भी कई मंत्री असहज हुए थे।
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने और दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ एक्शन में हैं। अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के काम का प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत अब योगी कैबिनेट के मंत्री केवल चार दिनों के लिए लखनऊ में रहेंगे और बाकी तीन दिन वह अपने जिलों में रहेंगे और लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे। सीएम योगी ने मंत्रियों के लिए नई व्यवस्था तय की है और हर मंत्री को सोमवार, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को राजधानी में रहकर विभागीय कार्यों का निपटारा करना होगा। वहीं, सोमवार को वह लखनऊ में जनता से मिलेंगे और शिकायत पर सुनवाई करेंगे जबकि मंगलवार को कैबिनेट की बैठक है और उस दिन वह जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। बुधवार और गुरुवार को वे अपने कार्यालयों में बैठेंगे। जानकारी के मुताबिक, सीएम योगी ने कैंप कार्यालय के बजाय मंत्रियों को अपने कार्यालयों में जनता, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से मिलने की सलाह दी है। वहीं, शुक्रवार को मंत्रियों को जिन जिलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है, उन जिलों में रहना है।फिलहाल प्रदेश की योगी सरकार का पूरा फोकस लोक कल्याण संकल्प पत्र के वादों को पूरा करने में है। सीएम योगी ने इसके लिए मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए हैं और कहा है कि सरकार को लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है । मंत्रियों को न चाहते हुए भी अब योगी के इस फरमान के हिसाब से अपने कार्यक्रम तय करने होंगे। एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहली बार सीएम ने इस तरह का आदेश जारी किया है। अभी कई लोग वेट एंड वाच की मुद्रा में हैं। जल्द ही इसको अमल में लाने का प्रयास किया जाएगा।
साल 2023 शुरू हो गया है और लोकसभा चुनाव को अब सिर्फ 1 साल ही बचा है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं, नेता गुणा-गणित लगा रहे हैं। कौन सी पार्टी किसका साथ देगी, इसके लिए भी बातचीत शुरू हो गई है। कहा जाता है कि दिल्ली की कुर्सी का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है। ऐसे में यूपी की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर अपने पत्ते खोल दिए हैं। अखिलेश यादव ने बताया कि लोकसभा चुनाव में वो किसका साथ देंगे? सपा का वोट बैंक भी मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग है । भाजपा इसमें भी सेंध लगाने की रणनीति बना रही है। तीन जनवरी को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली से इधर रवाना होगी। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बना चुके हैं और अब उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने प्लान का खुलासा कर दिया है। अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर तीसरा मोर्चा बना तो वो उसका साथ देंगे।
हाल ही में अखिलेश यादव ने कहा था कि उनको कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि उनकी यात्रा के साथ हमारी भावनाएं हैं। फिर अखिलेश ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों एक ही हैं। इससे साफ हो गया है कि अखिलेश यादव अब कांग्रेस-बीजेपी से इतर जो मोर्चा बनेगा, उसके साथ रहेंगे। अखिलेश यादव ने आगे कहा कि हमारे दल का सिद्धांत अलग है, बीजेपी-कांग्रेस दोनों एक हैं। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से दावा किया गया था कि उनकी तरफ से भारत जोड़ो यात्रा में अखिलेश यादव, मायावती और जयंत चैधरी समेत गैर-बीजेपी दलों के नेताओं को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
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