Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानंद ऐसे गुरुवर के शिष्य,
पढ़ लेते चेहरा देखकर ही जो भविष्य।
भुवनेश्वरी देवी माता विश्वनाथ थें पिता,
१२ जनवरी १८६३ में जन्में कलकत्ता।।

इनके बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त,
२५ की उम्र में पहन लिए गेरुआ वस्त्र।
स्वामी रामकृष्ण परमहंस के थें शिष्य,
अलग ही पहचान बनाई देशों में सर्वत्र।।

पैदल ही किया इन्होंने भारतवर्ष यात्रा,
बुद्धी मे तेज सेवा भावी इनकी आत्मा।
अनेंक परेशानियों का किए ये सामना,
भारत का गौरव बढ़ाए ये ऐसी आत्मा।।

रामकृष्ण मिशन शाखा स्थापित किया,
विदेशों में भी नाम गौरवांवित ये किया।
गुरुभक्ति गुरुसेवा गुरुप्रति अनन्यनिष्ठा,
अत्यन्त गरीबी पर अतिथि सेवा किया।।

अपनें को सदा गरीबो का सेवक कहते,
दुःख कष्ट पीड़ा में सहयोगी खुद बनते।
न करते लापरवाही नही किसी से घृणा,
इसलिए आज हमसब उन्हें याद करते।।

सैनिक की कलम गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ