हिन्दी मेरी माँ
हिन्दी के लिए जीत हूँ।
हिन्दी में ही लिखता हूँ
हिन्दी को ही पढ़ता हूँ।
मेरी हर एक सांस पर
हिन्दी का ही साया है।
इसलिए मैं हिन्दी पर
समर्पित करता अपना जीवन।।
करें हिन्दी से सही में प्यार
तो कैसे करे लिखने से इंकार।
हिंदी मेरी मातृभाषा है तो
पढ़ने बोलने से क्यों करे इंकार।
हिन्दी बस्ती है हिंदुस्तानीयों की
हर दिलकी धड़कनों में।
इसलिए तो प्रेम,भक्त गीत
लिखे जाते है हिंदी में।
जो हर भारतीयों का
सदा गौरव बढ़ते है।।
करो हिन्दी का प्रचार प्रसार
तभी तो राष्ट्रभाषा बन पायेगी।
और हिन्दी भारतीयों के
दिलो में बस पायेगी।
चलो आज लेते है
हम सब एक शपथ।
की करेंगे सारा कामकाज
आज से हम हिन्दी में।
तभी तो मातृभाषा का उतार पाएंगे
कर्ज हम भारतीय ।।
और सच और अच्छे
हम भारतीय कहलाएंगे।
संजय की यह रचना
समर्पित है हिंदी भाषा के लिए।
करो प्रयोग हर समय
हिंदी भाषा का आप सब।
बहुत बड़ा होगा उपकार
हमारी हिंदीभाषा पर।।
हिंदी दिवस पर सभी पाठकों को बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबईहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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