बाजार और रोजगार
नफरो के बाजार में देखो
प्रेम कैसे बिक रहा।
जिसे पूरा बाजार आज
कितना गर्म हो रहा।
बिकने वाले ही तो
यहाँ खरीदने वाले है।
क्योंकि ये सब जो
प्रेम के पुजारी है।।
क्या मिलता है लोगों को
नफरतो के बीज बोने से।
जो इंसानो को इंसानो से
निश्चित ही दूर करते है।
जबकि भाई चारे और प्रेम से
दिलों को जीत सकते है।
और नफरतो के बाजारों को
प्रेमभाव से बंद कर सकते है।।
भले ही गोरे देश छोड़ गये हो
पर अपनी दोगली नितियाँ छोड़ गये।
जिसके कारण ही हमारा देश
उसी राह पर चल रहा है।
और इंसान ही इंसान को
देखो कैसे डस रहा है।
और गुलामी की जंजीरो में
जकड़ा जा रहा है।।
अब तो राजनीति की परिभाषा
देखो कितनी बदल गई है।
जो सच में कभी
देश सेवा हुआ करती थी।
वही राजनीति आज देखो
व्यापार बन गई है।
जिसे न जाने कितने लोग
राजनीति को रोजगार बना रहा है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबईहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
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