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भाव संपदा से संपन्न विदुषी कवयित्री हैं डौली बगड़िया:-डा अनिल सुलभ

भाव संपदा से संपन्न विदुषी कवयित्री हैं डौली बगड़िया:-डा अनिल सुलभ

  • साहित्य सम्मेलन में काव्य-संग्रह 'अंतर्द्वंद्व' का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी । 

पटना, ९ अगस्त। काव्य-सृजन के लिए आवश्यक भाव-संपदा से अत्यंत संपन्न और विदुषी कवयित्री हैं डौली बगड़िया 'अनिल'। इनकी रचनाओं में नारी-मन की सुमधुर और मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्ति मिलती है। इनके काव्य-क्षितिज पर केवल नारी-मन के कोमल चित्र ही नहीं, जीवन के विविध रंगों, उसके सुगंध और सौंदर्य भी चित्रित हुए हैं। इनकी रचनाओं में समाज की पीड़ा और उसके प्रतिकार के स्वर भी लक्षित होते हैं।
यह बातें रविवार को, साहित्य सम्मेलन के तत्त्वावधान में आयोजित समारोह में श्रीमती बगड़िया के काव्य-संग्रह 'अंतर्द्वंद्व' के लोकार्पण के पश्चात अपने अध्यक्षीय संबोधन में, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि, लोकार्पित पुस्तक में कवयित्री की ४६ कविताएँ संकलित हैं, जो जीवन के सभी रूप-रंगों को अपने भावों में समेटती है।
समारोह का उद्घाटन करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश तथा उपभोक्ता संरक्षण आयोग, बिहार के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि साहित्य सम्मेलन हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में तथा नवोदित साहित्यकारों के उत्साह-वर्द्धन के लिए अत्यंत प्रशंसनीय कार्य कर रहा है। डौली बगड़िया की प्रथम कृति ही बहुत प्रभावित करती है।
हिन्दी और भोजपुरी के वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि डौली जी की रचना शीलता में जहां सीता सहित अनेक स्त्रियों की वेदना है, वही संस्कार, संस्कृति और संवेदना के भी गहरे स्वर हैं। इनकी कविता में सत्यम, शिवम और सुंदरम' के विचार अभिव्यंजित होते हैं।।
समारोह के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध समाजसेवी पद्मश्री विमल जैन ने कहा कि डौली जी को मैंने साहित्य सम्मेलन के ही एक आयोजन में पहली बार सुना था। उनकी काव्य-प्रतिभा ने मुझे बहुत प्रभावित किया। ये एक समर्थ और संवेदनशील कवयित्री हैं।
सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, समारोह के विशिष्ट अतिथि और अवकाश प्राप्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश जी रतेरिया, वरिष्ठ साहित्यकार तनसुख लाल बैद, डा पूनम आनन्द, चंदा मिश्र तथा लेखिका के पति अनिल कुमार बगड़िया ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा कवयित्री के प्रति शुभकानाएँ व्यक्त की।
इस अवसर पर, आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र द्वारा वाणी-वंदना से हुआ। वरिष्ठ कवि बच्चा ठाकुर, शायरा तलत परवीन, जय प्रकाश पुजारी, कुमार अनुपम, मधुरानी लाल, शुभचंद्र सिन्हा, डा शालिनी पाण्डेय, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, श्रीकांत व्यास, ई अशोक कुमार, डा विद्या चौधरी, इंदु उपाध्याय, रेखा भारती, नीतू चौहान, डा सुषमा कुमारी, अर्जुन प्रसाद सिंह, महेश कुमार मिश्र 'मधुकर', सिद्धेश्वर, चंदा मिश्र, डा कुन्दन लोहानी, अश्विनी कविराज आदि कवियों एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से आयोजन को सरसता प्रदान की।
आपने कृतज्ञता ज्ञापन में कवयित्री डौली बगड़िया ने अपने लोकार्पित पुस्तक से तीन प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।सम्मेलन के अर्थ मंत्री प्रो सुशील कुमार झा, बाँके बिहारी साव , डा नागेश्वर प्रसाद यादव, कृष्ण कुमार बगड़िया, सुयश बगड़िया, पीयूष बगड़िया, पूनम बगड़िया, सत्चित, सौम्या , मुकुंद समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
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