Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

बेटी----

बेटी----

मैंने देखा बेटी जब सयानी होती है,
पिता की पेशानी पानी-पानी होती है।
नींद उड़ जाती है माँ की आँखों से,
भाई की आँखे उसका साया बनी होती हैं।


पर बेटी ने आज खुद को बदला है,
बेटे सा साहस उसने पाला है।
माँ-बाप का सहारा बेटी बनी है,
आज बेटी ने घर बाहर संभाला है।


पढ़ लिख कर बेटी आगे बढ़ी है,
सत्ता के शीर्ष तक बेटी चढ़ी है।
इस जमीं की बात क्या करें हम,
आज बेटी चाँद तारों से आगे बढ़ी है।


चाहें बेटी नित नए मुकाम पाए,
ज्ञान से विज्ञान परचम फहराए,
धर्म के शीर्ष पर छा जाये बेटी,
पिता की शान बेटी बन जाए।


सिखाएं बेटी को खुद पर भरोसा रखे,
संस्कारों की सीख निज जीवन में रखे।
अपने साहस व हुनर से जाए शिखर तक,
दुनिया को बेटी अपने कदमों में रखे।

अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ