प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पीबीएल)
✍️ डॉ. अंकेश कुमार
दुनिया भर में पिछले 100 सालों से प्रारंभिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की पद्धति अपनाई जा रही है।भारत भी आरंभिक दिनों में बुनियादी विद्यालय के जरिए इस संकल्प की नीव रखी। कोठारी आयोग , नई शिक्षा नीति भी प्रयोगशालाओं की महत्ता को सिरे से नकार नहीं पाए।
अब नई शिक्षा नीति पुनः नए सिरे से इस बात पर ज़ोर दे रही है कि विज्ञान के बढ़ते कदम को अगर हम मजबूती प्रदान कर सकते हैं तो वो है प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग जिसके जरिए पढ़ना, समझना, कर के सीखना जैसे चरण बद्ध प्रयासों से हम न केवल पाठ्य पुस्तकों के पाठों को वरन अपने आस पास के वातावरण में सन्निहित वैज्ञानिक अवधारणाओं को एवं अपने प्रयासों से, अपनी मौलिक सोच से, नवाचारी संकल्पनाओं को मूर्त रूप दे सकते है।
इस क्रम में संभव है यूरेका जैसी परिघटना का जन्म हो और जाने अंजाने अपने चिंतन से एक नई व्यवस्था जन्म ले जो सम्पूर्ण मानवता और बदलते वातावरण के लिए, इस धरती के लिए वरदान सिद्ध हो।
प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग(पीबीएल) एक महत्वकांक्षी योजना है ,जिसे प्रारंभिक विद्यालयों के स्तर से बहुत गंभीरता से लागू किया जा रहा है।
विज्ञान के शिक्षकों को सफल क्रियान्वयन हेतु इसका प्रशिक्षण भी शुरू है।
राज्य की स्कूली व्यवस्था की शीर्ष संस्था एससीईआरटी के निदेशक आदरणीय आर.सज्जन ने मंत्रा 4 चेंज, साइंस फॉर सोसाइटी एवं अन्य सामाजिक, वैज्ञानिक संस्थाओ के सहयोग से मिलकर संयुक्त निदेशक आदरणीय रश्मि प्रभा जी के कुशल नेतृत्व में इस कार्यक्रम के ऊपर एक हस्त पुस्तिका भी विकसित की हैं।इसमें पाठ आधारित कक्षा 6,7,8 के चुने हुए 24 प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है जो सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को लगभग आच्छादित करते है और इसे दीक्षा ऐप पर भी अपलोड किया गया है। विदित हो की पिछले सप्ताह 24 अगस्त को इस हस्त पुस्तिका का विधिवत अनावरण भी एससीईआरटी द्वारा किया गया है।
नीरज दास गुरु, स्टेट हेड, विशाल पांडे, गुंजन चतुर्वेदी, डॉ. अंकेश कुमार, श्री सबीउल हक, श्री नृपेंद्र कुमार, श्री अरुण कुमार, श्री अरुण कुमार सिन्हा, श्रीमती कुमारी आराधना, सुश्री अश्विनी,शिल्पी, बाल वैज्ञानिक हर्ष राजपूत एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की कुशल टीम द्वारा इसे बड़ी सावधानी से विकसित किया गया है, जिसमे आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल किया गया है।
डॉ रश्मि प्रभा के शब्दों में यह आने वाले दिनों में मील का पत्थर साबित होगा।
निश्चित रूप से हम कह सकते है की विज्ञान जो अभी तक एक विषय था पीबीएल उसे नया क्षितिज प्रदान करने वाला होगा और जल्द ही विज्ञान एक व्यवहारिक ज्ञान का विषय बनेगा और बच्चे अपने जिज्ञासु और अन्वेषी स्वभाव के कारण इसे पूर्णतः आत्मसात करेंगे।
कुछ समीक्षक द्वारा यह चिंतन भी सामने लाया जा रहा है की राज्य के अधिकांश विद्यालयों में आधारभूत संरचना के अभाव में, विद्यालयों में विज्ञान के शिक्षकों के अभाव में, पुस्तकालय के अभाव में एवं प्रयोगशाओं के आवश्यक सामग्रियों के अभाव में यह भी आने वाले समय में अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने से पीछे रह जायेगा।
इस विषय में शिक्षाशास्त्री यह मानते है की निश्चित रूप से उपरोक्त समस्या के निवारण के लिए राज्य को आगे आना चाहिए परंतु हमे भी आशाएं नही छोड़नी चाहिए।जहां चाह , वहीं राह।
बच्चों के कबाड़ से जुगार तक नए नए मॉडल निर्माण को हम भली भांति प्रवृति के रूप में खूब जानते है।उन्हे अगर हम सभी प्रोत्साहित करें तो वे अपना सही रास्ता खोजने में सक्षम हैं।
नई शिक्षा नीति 2020 भी इस संकल्प को सिद्धि तक ले जाने के लिए संकल्पित है।
भारत ज्ञान ,विज्ञान की दुनिया में अपने महत्वपूर्ण दायित्व को लेकर गंभीर है।
हम सब की शुभकामनाएं हैं की स्कूली शिक्षा प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग के तहत और भी सर्वोत्तम हो और अपनी कुशलता एवं दक्षता के मानक की संप्राप्ति हेतु सक्षम हो।_लेखक प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की हस्त पुस्तिका जो एससीईआरटी महेंद्रू द्वारा तैयार किया गया है के टीम का हिस्सा हैं। वे 22 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे है, प्राचार्य भारती एम. एस. के साथ साथ अखिल भारतीय शिक्षा अधिकार मंच के बिहार चैप्टर के सदस्य सचिव है एवं यह लेखक के अपने विचार हैं।______
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